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बलात्कारी अफसर का सिर काटकर ले गया था वीरप्पन

नई दिल्ली। हरियाणा के डीजीपी ने हाल ही में कहा है कि यदि कोई अपराधी आपकी माता बहनों के साथ गंदी हरकतें करे तो आम आदमी को अधिकार है कि वो अपराधी की हत्या कर दे। वीरप्पन ने भी तो ऐसा ही किया था। एक अफसर ने उसकी बहन का रेप किया। बहन ने आत्महत्या कर ली और गुस्साए वीरप्पन ने अफसर का सिर काट डाला। सवाल यह है कि यदि हरियाणा के डीजीपी सही हैं तो वीरप्पन को डाकू क्यों कहा गया। 

तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में ऐसे आज भी कई गांव हैं जहां वीरप्पन को खूंखार डकैत नहीं, बल्कि रॉबिनहुड के रूप में जाना जाता था। कहते हैं कि वीरप्पन पुलिस और सरकार के जितना खिलाफ था, उतना ही वो आम और गरीब जनता की मदद करता था। उसे लोग मसीहा मानते थे। 

वीरप्पन पर कई आर्टिकल पब्लिश कर चुके तमिलनाडु के सीनियर जर्नलिस्ट आर. गोपाल उर्फ़ नक्कीकरण के मुताबिक, वीरप्पन दिल का अच्छा इंसान था। पुलिस के अत्याचारों ने ही उसे क्रूरता के दलदल में धकेला था। 

कहा जाता है कि वीरप्पन डकैत नहीं बनता यदि उसकी बहन आत्महत्या नहीं करती। डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) पी. श्रीनिवास ने वीरप्पन की बहन के साथ रेप किया था। जिसका बदला वीरप्पन ने पी. श्रीनिवास का सिर धड़ से अलग कर लिया था, इसके बाद से ही वीरप्पन पुलिस और सरकार के खिलाफ हो गया।

रॉबिन हुड वीरप्पन...
तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के कई गांवों में वीरप्पन की रॉबिन हुड की तरह छवि थी। उसके लिए गांववाले छत्र की तरह काम करते थे। उसे पुलिस की गतिविधियों के बारे में सूचनाएं दिया करते थे। उसकी हर तरह की मदद किया करते थे। यही वजह थी कि वीरप्पन की मौत के बाद उसका शव गांव से दूर दफन किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त वीरप्पन की अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए थे। यदि गांव के आसपास उसे दफन किया जाता तो स्थिति बिगड़ सकती थी।