रोहिणी अवस्थी। निश्चित रूप से राज्य शिक्षा सेवा एक अच्छा कदम है। शिक्षा को बेहतर और सबसे बेहतर बनाने के लिए प्रयास होने ही चाहिए। हर क्षेत्र के टॉपर्स मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल से आएं यही एक लक्ष्य होना चाहिए। सर्वोत्तम से कम पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए, परंतु एईओ की नियुक्ति से पहले अब इसका पुनरीक्षण अनिवार्य हो गया है। यह जरूर होना चाहिए।
पुनरीक्षण की क्या जरूरत
एईओ की चयन प्रक्रिया 3 साल पहले शुरू हुई थी। एईओ पात्रता परीक्षा के लिए अध्यापक/शिक्षक और प्रधान अध्यापक मावि को ही पात्र माना गया था। इसी आधार पर परीक्षा हुई। परिणाम निकले और सत्यापन भी हुआ परंतु नियुक्तियां नहीं हो सकीं। मामला न्यायालय में चला गया और समय बीतता गया। अब कई अध्यापक और शिक्षक, वरिष्ठ अध्यापक और व्याख्याता बन गए। ऐसी स्थिति में वो सभी एईओ के लिए अपात्र हो गए हैं। अत: जरूरी है कि पुन: सत्यापन कराया जाए। प्रक्रिया को रिव्यू किया जाए और जिन्होंने प्रमोशन ले लिया है उन्हें बाहर किया जाए। वेटिंग लिस्ट से नई मेरिट लिस्ट बनाई जाए। इसके बाद ही एईओ की नियुक्तियां की जाएं। यह न्यायोचित भी है और आवश्यक भी।
रेाहिणी अवस्थी
अध्यक्ष प्रधान अध्यापक संघ, शिवपुरी
