दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को रेग्यूलर नहीं कर सकते: शिवराज सरकार

भोपाल। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के मामले में शासन ने सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई के दौरान पेश किए गए जवाब में कहा कि प्रदेश में बहुत सारे दैवेभो कर्मचारी हैं। इन्हें रेगुलर करने में सरकार पर करोड़ों रुपए का भार आएगा। प्रदेश के कई विभागों के कर्मचारियों व कई कर्मचारी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। इस मामले में पिछले महीने हुई सुनवाई में प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी अंटोनी डिसा समेत कई विभागों के प्रमुख सचिवों को हाजिर होना पड़ा था। 

इस दौरान ही शासन की ओर से जवाब पेश किया गया था। 28 पेज के जवाब में शासन ने यह दलील भी दी कि इस मामले में कई दैवेभो कर्मचारी न तो हाईकोर्ट गए न ही सुप्रीम कोर्ट। सभी को रेगुलर करने के मसले पर ही शासन ने यह दलील दी थी। इस मामले में अब अगली सुनवाई नौ दिन बाद होना है। कुछ कर्मचारियों की ओर से पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वकील परमानंद पांडेय ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश किसी एक कर्मचारी पर लागू होता है, वह उस संवर्ग के सभी कर्मचारियों पर लागू होना चाहिए। 

CS समेत कई पीएस ने हलफनामे भी पेश किए
सुनवाई के दौरान सीएस समेत कई विभागों के प्रमुख सचिवों ने हलफनामे भी पेश किए हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल, जल संसाधन विभाग के आरएस जुलानिया, नगरीय विकास और पर्यावरण विभाग के मलय श्रीवास्तव शामिल हैं। 
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