अजमेर। उपभोक्ता कानून के तहत पेंशनर उपभोक्ता होता है और उसके पेंशन प्रोविडेंट फंड से जुड़े विवादों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार उपभोक्ता मंच को है। जिला उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष विनय कुमार गोस्वामी और सदस्य ज्योति डोसी नवीन कुमार ने यह व्यवस्था देते हुए अपने निर्णय में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। रोडवेज के कर्मचारी को पेंशन योजना का लाभ नहीं देने के मामले में विवाद उपभोक्ता मंच के समक्ष पेश हुआ था।
मंच ने अपने निर्णय में भविष्य निधि विभाग को रोडवेज कर्मचारी की काटी हुई भविष्य निधि राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। रोडवेज काे उक्त समस्त राशि पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज और दस हजार रुपए क्षतिपूर्ति के अलावा ढाई हजार रुपए परिवाद व्यय दो माह में अदा करने के आदेश दिए गए हैं। रोडवेज कर्मचारी शिवनाथ योगी की पत्नी गंगा देवी ने वकील सूर्यप्रकाश गांधी के जरिये मंच में परिवाद प्रस्तुत किया था।
परिवादिया का कहना था कि उसके पति 2005 में रोडवेज के सहायक यातायात के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस दौरान कर्मचारी पेंशन योजना के तहत उसके वेतन में से कटौती की जाती रही। सेवानिवृति के बाद उसने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन रोडवेज रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर ने उसे पेंशन का हकदार नहीं माना। उनका तर्क था कि कर्मचारी की दस वर्ष तक नियमित कटौती नहीं हुई। मंच में दोनों विभागों की ओर से जवाब में कहा कि पेंशन संबंधी मामलों में उपभोक्ता मंच को सुनवाई का अधिकार नहीं है।
मंच ने अपने निर्णय में कहा कि परिवार पेंशन योजना 1971 का लाभ पाने के लिए कर्मचारी को विकल्प देना आवश्यक था, जो नहीं दिया गया। इसके बावजूद रोडवेज ने कर्मचारी के वेतन में से अंशदान की राशि काट कर भविष्य निधि विभाग को भिजवाई है। इसलिए प्रार्थिया अपने पति की पेंशन अंशदान की राशि प्राप्त करने का अधिकारी है।
