नईदिल्ली। ईपीएफ पेंशन से जुड़े 15 करोड़ कर्मचारियों के हक के लिए अब आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। इसी साल 7 दिसंबर को देशभर के 15 लाख कर्मचारी दिल्ली में इकट्ठे होकर प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारी निवृत पेंशन योजना 1995 राष्ट्रीय समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रकाश येंडे ने रविवार को राजधानी में यह घोषणा की। समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की रविवार को भोपाल में हुई बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने यह कहा।
येंडे ने कहा कि सरकार ने इन कर्मचारियों के करोड़ों रुपए पब्लिक फंड में लगा दिए। यह बहुत बड़ा अपराध है। केंद्र के मंत्री कहते हैं सरकार के पास राशि नहीं है। इसके लिए हम केंद्र सरकार के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराएंगे। जल्द ही जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।
बैठक को निगम अध्यक्षों शिव चौबे, तपन भौमिक समेत समिति की प्रदेश संयोजक चंद्रशेखर परसाई, अजय श्रीवास्तव समेत कई कर्मचारी नेताओं संबोधित किया। सुबह 10 बजे से पंचानन भवन में शुरू हुई बैठक दो सत्रों में दोपहर तीन बजे तक चली। बैठक को अन्य राज्यों से राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। परसाई ने बताया कि 25 सितंबर को वर्धा में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
31 मार्च 2015 तक ईपीएफधारी 15,84,70,434 रजिस्टर्ड थे। इनके 2,38,531.84 करोड़ जमा थे। मार्च 2015 तक पेंशनधारक बढ़कर 51,04,397 थी। 2014-15 तक जमा पर 19,097.28 करोड़ सिर्फ ब्याज में ही कमाए। 13 नवंबर 2012 को सरकार ने बीएस कोशीयारी के अध्यक्षता में कमेटी बनाई। जिसने 29 अगस्त 2013 को रिपोर्ट पेशकर न्यूनतम पेंशन 3000 रु. व डीए देने की सिफारिश की, जिस पर सरकार ने आज तक अमल नहीं किया।
16 नवंबर 1995 को देश में कर्मचारी पेंशन योजना शुरू की गई। शुरू में ईपीएफ अंशदाताओं के लिए रिटायरमेंट के बाद न्यूनतम 500 व अधिकतम 1750 रुपए तय की गई थी। इसका विरोध हुआ तो सरकार ने सफाई दी कि हर साल इसकी समीक्षा की जाएगी। 19 अगस्त 2014 को सरकार ने इसमें मामूली इजाफा कर 1000 व 2500 रुपए कर दिया। तय की अधिकतम पेंशन तक नहीं दी गई। इसी को लेकर आंदोलन किया जाएगा।
