भोपाल। 263 करोड़ के पंच भत्ता घोटाले की जांच होगी। स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से पड़ताल कराई जाएगी। यह सत्यापन होगा कि आखिर गड़बड़ी कहां और कैसे हुई। यह जानकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने दी।
दरअसल, पंचायत विभाग गौण खनिज पर अतिरिक्त कर (सेस) से मिलने वाली राशि में से जिला पंचायतों को पंचों को भत्ता देने के लिए पंचों की संख्या के हिसाब से राशि देता है। ये राशि जनपद पंचायत के माध्यम से पंचायतों को दी जाती है, इसलिए व्यापक जांच होगी। साथ ही अब बैठक के तत्काल बाद पंचों को भत्ता दिया जाएगा।
मंत्री भार्गव ने बताया कि 313 जनपद पंचायतों के माध्यम से 23 हजार से ज्यादा पंचायतों के पंचों को बैठक भत्ता देने की व्यवस्था है। पंचायतराज संचालनालय से राशि जारी होती है। इस साल भी राशि दी गई है। कौन राशि निकालता था, कैसे दी जाती थी, इन सब मुद्दों को देखना पड़ेगा। जिलों से रिपोर्ट बुलाई जाएगी। स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराएंगे। सत्यापन कराया जाएगा कि आखिर गड़बड़ी कहां हुई है।
अब नई व्यवस्था
साथ ही अब नई व्यवस्था लागू की जा रही है। बैठक के बाद ही पंच को दो सौ रुपए नकद दे दिए जाएंगे। सरपंच और पंचायत सचिव एक रजिस्टर बनाएंगे। इसमें भत्ता लेने वाले सचिव का नाम, राशि और हस्ताक्षर होगा। इसका प्रचार करने के लिए पंचायिका में विज्ञापन भी निकाल दिए हैं, ताकि पंचों को पता लग जाए कि नई व्यवस्था क्या है।