भोपाल। इंदौर के नेता एवं मध्य प्रदेश सरकार की नगरी प्रशासन मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय के मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई करते हुए उज्जैन संभाग के कमिश्नर श्री आशीष सिंह ने देवास के एसडीएम श्री आनंद मालवीय और उनके बाबू को सस्पेंड कर दिया गया है।
एसडीएम आनंद मालवीय का आदेश वायरल हो गया
दरअसल, सोशल मीडिया पर एसडीएम का एक आदेश वायरल हो गया है। इसमें उन्होंने दिनांक 4 जनवरी को देवास में होने वाले कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की प्रशासनिक निगरानी के लिए तहसीलदार से लेकर पटवारी तक की ड्यूटी लगाई थी। यह एक इंटर ऑफिस मेमो था, जो पब्लिक के लिए नहीं था लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस आदेश की प्रस्तावना में बड़े ही शरारत पूर्ण तरीके से कांग्रेस पार्टी के ज्ञापन को कॉपी पेस्ट किया गया है। इसके कारण आदेश की भाषा ही बदल गई और वह चर्चा का विषय बन गया। आदेश में लिखा था कि:-
कार्यालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी डीनुभाग देवास (ग.प्र.)
क्रमांक / 44 / रीडर-1/2026 देवास, दिनांक 03/01/2026
- ओदश:-
इंदौर में भाजपा शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए मल मूत्र युक्त गंदा पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो गई और 2800 व्यक्ति उपचारत है। 'इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा पत्रकार के प्रश्न के जवाब में अशोभनीय टिप्पणी "घंटा" का उपयोग करना अमानवीय ओर निरंकुशता की निशानी है। प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री जीतू पटवारी जी के निर्देशनूसार निर्णय लिया गया है की इस अमानवीय व्यवहार के विरोध में भाजपा के सांसद एवं विधायकों के निवास के सामने घंटा बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
अतः उक्त अवसर पर कानून एवं व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए कानून एवं व्यवस्था को बनाये रखने के लिए निम्नानुसार तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, राजस्व निरीक्षक / पटवारियों की ड्यूटी दिनांक 04.01. 2026 समय दोपहर 12.00 बजे से कार्य समाप्ति तक के लिए लगाई जाती है:-
राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आनंद मालवीय एसडीएम सस्पेंड
इसके वायरल होने के बाद उज्जैन के कमिश्नर श्री आशीष सिंह ने एसडीम श्री आनंद मालवीय एवं इस आदेश को टाइप करने वाले बाबू, दोनों को तत्काल सस्पेंड कर दिया है।
एसडीएम के निलंबित हो जाने के कारण अब यह मामला भोपाल तक की चर्चा में आ गया है और निश्चित रूप से आज शाम तक नेशनल मीडिया की सुर्खियों में भी होगा।
X/Twitter पर प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हुआ और मुख्य रूप से व्यंग्यात्मक, आलोचनात्मक तथा राजनीतिक रूप से ध्रुवीकृत प्रतिक्रियाएं आईं:
- कई यूजर्स (खासकर भाजपा समर्थक या तटस्थ) इसे हास्यास्पद बताते हुए मजाक उड़ा रहे हैं। उदाहरण: "घंटा शब्द ने SDM को कराया निलंबित", "मध्यप्रदेश में अब घंटा शब्द बैन है", "SDM ने मंत्री जी के 'घंटा' को ऑर्डर में घंटा बजा दिया"। कुछ ने इसे पुराने बिहार जैसी स्थिति से जोड़ा। ये पोस्ट्स हजारों व्यूज और रीपोस्ट्स पा रही हैं।
- विपक्षी समर्थक या सरकार के आलोचक इसे अलोकतांत्रिक और दमनकारी कदम बता रहे हैं। वे कह रहे हैं कि मंत्री विजयवर्गीय ने खुद 'घंटा' शब्द बोला लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि अधिकारी ने केवल लिखा तो सजा मिल गई। कुछ ने इसे भाजपा सरकार की निरंकुशता का प्रमाण बताया और पूछा कि क्या 'घंटा' शब्द अब प्रतिबंधित है।
कुल मिलाकर, प्रतिक्रियाएं ज्यादातर व्यंग्य और राजनीतिक तंज से भरी हैं, गंभीर समर्थन या विरोध कम दिखा। मामला अभी ताजा है, इसलिए चर्चा जारी है।
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