मुगालता मन से निकाल दें की केवल आप ही समस्याओ के जानकार है

Updesh Awasthee
H N NARWARIYA। कल एक आदेश सोशल मीडिया (फेसबुक ,वाट्स एप) पर यह कह कर प्रसारित किया गया की, अध्यापको के वेतन निर्धारण की प्रक्रिया अभी लंबित है और वित्त विभाग की सहमति से आदेश जारी किया जाएगा, लेकिन उस आदेश ने हमें एक सच्चाई से रूबरू करवा दिया की, सहायक अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक को अंतरिम राहत में क्रमशः 1000 और 500 रूपये की कमी थी, का लाभ अब नहीं मिलेगा। इस प्रकार एक सहायक अध्यापक को 48000 और वरिष्ठ अध्यापक को 24000 का नुकसान होगा। यह आदेश उच्च न्यायलय में दायर याचिका wp 2999/15 के संदर्भ में जारी किया गया है।

साथियों आदेश के बिंदु क्रमांक 6.2 की अंतिम 6 लाईन का अध्ययन करें, जो यह कहता है की 31 दिसम्बर 15 की सकल परिलब्धि दिनांक 1 जनवरी 16  से कम होने के कारण  कर्मचारियों को दिए जाने  वाले नियम 2009 के नियमो का  लाभ अध्यापक संवर्ग को नहीं दिया जा सकता ,अर्थात 7440 और 10230 का लाभ नहीं दिया जा सकता (इन लाइनो को लिखने का क्या उद्देश्य है समझ नहीं आरहा है)। इसी प्रकार बिंदु क्रमांक 7 का अध्ययन करे इसमे कहा गया है की अभी तक वेतन निर्धारण के आदेश जारी नही हुए है, वित्त विभाग की सहमति से यथा समय जारी किये जाएंगे। यह दोनों बिन्दू अनंत संदेह उत्पन्न कर रहे है। 

साथियों इस आदेश के बचाव में सोशल मिडिया में अचानक से बाढ़ आई हुई है। आप ने पहले क्या किया, अब तक क्यों चुप रहे, हम विसंगति को सबके सामने लाये है, हमने क्या गुनाह किया आदि -आदि जैसे कुतर्क किये जा रहे है और भाषा तो आप जनाते ही है जैसे कुसंस्कार हैं उसी के अनुसार है। 

अपराध तो यह किया है की 2 दिसम्बर 15 से ही आप कहते आरहे हो की अंतरिम राहत का केस जीत गए है ।गुनाह यह की आप अखबारो में समाचार देते रहे की सहायक अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक को 1000-1000और 500-500 रूपये का लाभ होगा ,आप ने गुनाह यह किया की जो पत्र 25 फरवरी 2016 को जारी हुआ उसे किसी और  रंग में रंग कर पेश कर रहे हैं ,पुरे अध्यापक जगत को यह मालूम था की विसंगति है फिर भी आप बड़ी फूहड़ता से कह रहे है की हमने विसंगति उजागर की। 

आप से निवेदन है  दुनिया को यह न समझाये की प्रयास आप ने ही किया  है ।और लोग भी हैं प्रायास करने वाले ।आप आम अध्यापक से माफ़ी मांगे की आप ने न्यायालय के आदेश को आम अध्यापक के समाने अपनी जित की तरह प्रस्तुत किया जबकि आदेश में सिर्फ अभयावेदन का निराकरण करने का कहा गया था ,जैसा की गुरुजी को 2001 से नियमित करने और अतिथि को संविदा शिक्षक बनाने वाली याचिकाओं में था ।सभी में अभ्यवावेदन के निराकरण का आदेश दिया गया है ।

साथियों आप को जानकारी थी की  अंतरिम राहत की विसंगति में सुधार का एक प्रस्ताव कौर्ट की याचिका के कारण लंबित था । इस आदेश के साथ उसका भी समापन हो गया है ।आप हौसला बनाये रखें आप के हौसलो के कारण ही हम ,नियमित हुए ,शिक्षको के समान अवकाश की पात्रता मिली ,नवीन पेंशन योजना का लाभ मिला और समान वेतनमान मिला है  ।आप का हौसला कायम रहा तो समान वेतन भी शिक्षक के समान ही जसकातस लेंगे ।

इस आदेश को देख कर हम यह तो कह सकते है की 1 सितम्बर 13 से 31 दिसम्बर 15 तक का एरियर हमें नहीं मिलेगा ,परंतु हमारा वेतन निर्धारण भी गलत होगा अभी नहीं कहा जा सकता ,अभी हमें वेतन निर्धारण पत्रक का इन्तजार करना चाहिये ।

आप से विनम्र निवेदन है की ,यह मुगालता मन से निकाल दें की केवल आप ही समस्याओ के जानकार है और अध्यापक हितेषी है ,हाँ आप सोश्यल मिडिया पर भी सक्रीय है ,अन्यथा आप से बढे जानकार और अध्यापक हितेषी प्रदेश में है ,लेकिन वे बस सोश्यल मिडिया पर सक्रीय नहीं है या उन्हें संचार का यह नया साधन उपयोग करना नहीं आता।  आप इतनी  बड़ी समस्या को जोर से और धनमकाने के अंदाज में बोलकर हल्का करने का प्रयास न करें।
धन्यवाद
प्रस्तुति ....

आई टी सैल 

राज्य अध्यापक संघ 
श्री सुरेश यादव 
श्री सियाराम पटेल 
श्री भरत भार्गव 
श्री एच एन नरवरिया

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