मप्र की बिजली: गैरों के लिए सस्ती, अपनों के लिए महंगी

Updesh Awasthee
भोपाल। पावर मैनेजमेंट कंपनी ने प्रदेश में बिजली 15 प्रतिशत महंगी करने का प्रस्ताव दिया है। जबकि अन्य राज्यों को बेची जाने वाली बिजली की दर में 20 फीसदी की कमी की बात कही गई है। इसी तरह घरेलू बिजली की खपत में एक साल में 12 फीसदी की अप्रत्याशित वृद्धि होने का अनुमान लगाया है। टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव पर विद्युत नियामक आयोग में पेश 90 आपत्तियों में ये बातें सामने आई हैं। आयोग को 29 जनवरी तक मिली आपत्तियों पर भोपाल, इंदौर और जबलपुर में अलग-अलग सुनवाई होगी। इसके बाद मार्च के अंतिम सप्ताह में नया टैरिफ जारी होगा। 

विद्युत मंडल के पूर्व अध्यक्ष पीएल नेने ने आपत्ति में कहा है कि कंपनी ने अपने प्रस्ताव में अगले साल घरेलू बिजली की खपत में 12 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान लगाया है, जबकि पिछले साल यह 4 फीसदी बढ़ी है। इसके आधार पर कंपनी अतिरिक्त बिजली खरीदेगी, जिसका भार उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि रेलवे और औद्योगिक बिजली दरों पर भी पुनर्विचार जरूरी है। महंगी बिजली के कारण रेलवे और बड़े उद्योग ओपन एक्सेस से बिजली ले रहे हैं या खुद के कैप्टिव पॉवर प्लांट लगा रहे हैं। 

बिजली टैरिफ याचिका पर विभिन्न संगठनों, रहवासी संघों और व्यक्तियों की ओर से 90 आपत्तियां आयोग को मिली हैं। इन आपत्तियों पर भोपाल, इंदौर और जबलपुर में सुनवाई आयोजित होगी। इसके बाद टैरिफ निर्धारण होगा। -शैलेंद्र सक्सेना, सचिव विद्युत नियामक आयोग 

स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट पर पड़ेगा असर 
इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने नगरीय निकायों के लिए बिजली दर में 19 फीसदी वृद्धि को गैरजरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि इससे निकायों को आमदनी से ज्यादा बिजली बिल देना पड़ेगा। ऐसे में स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत मिशन पर विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कंपनी के अकाउंट में 8000 करोड़ रुपए की गड़बड़ी होने की बात भी कही है। 

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