सामान्य ज्ञान भाग 13 (भारत और नेपाल के संबंध)

Updesh Awasthee
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भारत और नेपाल के संबंध पर एक नजर
नेपाल भारत के उत्तर मे स्थित है। अभी तक यह एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था, पर अक्टूबर 2006 में नेपाल में राजा के बिरोध मे हुएॅ सत्ता संघर्ष के बाद यह हिन्दू राष्ट्र नही रहा। भारत और नेपाल की सीमाएॅ उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड, तथा हिमालय के दक्षिणी ढाल पर मिलती है। नेपाल के साथ भारत के संबंध परम्परागत है। यह प्रसिद्ध है। कि नेपाल मे माता सीता जी तथा गौतमबुद्ध की जन्मस्थली है। पशुपतिनाथ का शिव मन्दिर नेपाल मे स्थित है। जो भारतीयो का प्रमुख धार्मिक स्थल है।

भारत और नेपाल के राजनीतिक और आर्थिक संबंध भी मजबूत है। भारत ने विकास योजनाओ के लिये। नेपाल को 8 करोड का अनुदान दिया। नेपाल के बीच 1974 में औद्योगिक व तकनीकी सहयोग बनाने के लिये समझौता किया, इस प्रकार भारत ने नेपाल के सामाजिक  और आर्थिक विकास मे काॅफी सहयोग दिया है। भारत ने नेपाल में 204 किलोमीटर लम्बे पूर्व पश्चिम राजमार्ग, जो महेन्द्र मार्ग कहलाता है, के निर्माण मे 50 करोड रुपया नेपाल को दिया। वीर अस्पाताल का बाह्म रोगी विभाग भी भारत के सहयोग से बना 1950 में भारत ने नेपाल के साथ व्यापारिक सन्धि की भारत ने नेपाल को समुद्र मार्ग की सुबिध दी है।भारतीय सुरक्षा की दृष्टि से नेपाल की बिशेष स्थिति है। नेपाल भारत और चीन के बीच स्थित है। 1950 में भारत नेपाल के बीच हुई सन्धि के अनुसार भारत, नेपाल को अपनी सुरक्षा के लिये शस्त्र आयातित करने की सुबिधा देगा। दोनो देशो के नागरिक  स्वतंत्र रुप से एक दूसरे के देश मे आ जा सकते है। नेपाल मे सामन्तशाही व्यबस्था समाप्त करने मे भारत की महत्वपूर्ण भूमिका थी। 

नेपाल से बहुत से बिद्यार्थी भारत मे अध्ययन करने के लिये आते रहे। नेपाल मे अक्टूबर 2006 में सत्ता परिवर्तन हुआ। इस सत्ता परिवर्तन के परिणामस्वरुप राजा का पद समाप्त कर दिया गया। और वहाॅ पूर्ण प्रजातांत्रिक सरकार स्थापित हुई। सत्ता परिवर्तन के बाद भी भारत नेपाल संबंधे मे कोई बदलाव नही आया है।

साम्प्रदायिक पंचाट पंच निर्णय
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री मेक्डानल्ड ने 1932 ई0 मे साम्प्रदायिक पंचाट पंच निर्णय की घोषणा कर दी। जिसमें भारत के हरिजनो के लिये। अलग से निर्वाचक मण्डलो की घोषणा कर दी। भारत को तोडने और जातियो में विभक्त करने के लिये ब्रिटिश सरकार की यह एक कूटनीतिक चाल थी। काग्रेस और भारत के लिये यह एक आघात था।  गाॅधीजी ने 21 दिनो का उपवास करने की घोषणा कर दी। गाॅधीजी और बाबा साहब डाॅ भीमराव अम्बेडकर के बीच पूना पैक्ट द्रारा साम्प्रदायिक पंचाट का हल खोजा गया। 

1930 से 1934 ई0 के बीच अनेक घटनाएॅ घटित हो चुकी थी। सविनय अवज्ञा आन्दोलन 1932 ई0 तक ठीक प्रकार से चलता रहा मगर उसके बाद वह लगभग समाप्त हो गया। और 1934 ई0 में उसको वापस लेने की घोषणा कर दी गई।

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