नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार स्कूलों से उनकी बसें जबरन नहीं ले सकती। करीब 400 स्कूलों की तरफ से दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि जो स्कूल अपनी मर्जी से बसें देना चाहें दे सकते हैं, लेकिन कोई दबाव नहीं चलेगा। इस मामले में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया गया है, जिसका जवाब 10 दिनों के भीतर देना है। इस पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को है। कोर्ट ने पब्लिक स्कूलों से उनके 400 सदस्यों की लिस्ट भी मांगी है। सरकार का कहना है कि 1700 स्कूल बसें उनके अभियान में शामिल हो गई हैं। जबकि दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों के पास कुल 2700 बसे हैं। यानी ईवन-ऑड की व्यवस्था में दिल्ली सरकार के पास 1000 बसों की कमी रहेगी। यह बसें प्राइवेट स्कूल से मिलने वाली थीं।
जब डॉक्टरों को छूट नहीं चाहिए तो वकीलों को क्यों?
ईवन-ऑड को लेकर हाईकोर्ट में एक और अर्जी लगाई गई, जिसमें वकीलों को छूट देने की गुजारिश की गई थी। इस पर अदालत ने साफ कर दिया कि जब जरूरी सेवाओं के तहत आने वाले डॉक्टरों को छूट नहीं चाहिए तो फिर आपको क्यों? याचिकाकर्ता राहुल अग्रवाल ने कहा कि मकसद बस इतना था कि हमें जल्दी-जल्दी एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट कई बार सुनवाई के लिए भागना होता है। ऐसे में अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेंगे तो यह भी हो सकता है कि समय पर न पहुंच पाएं और केस डिसमिस हो जाए।
बाइकों से भी प्रदूषण
ईवन-ऑड फॉर्मूले के दौरान बाइकर्स और महिलाओं को मिलने वाली छूट का मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा। इस पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से 4 दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा है और सुनवाई 6 जनवरी को होगी। याचिकाकर्ता के वकील जोगिंदर सुखीजा ने NDTV को बताया कि यह बात साबित है कि बाइक से भी काफी मात्रा में प्रदूषण होता है, ऐसी हालत में अगर छूट मिलती है तो मकसद पूरा नहीं होगा।
