रविन्द्र चौबे/छतरपुर। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व मप्र से राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी ने पत्रकारों से मुलाकात के दौरान मप्र में कांग्रेस की स्थिति पर पूछे गए सवालों के जबाव में कहा कि पार्टी को इस बात का आत्ममंथन करना होगा कि आखिर मप्र की जनता वर्तमान सरकार की अनेक खामियों के बावजूद चुनाव में कांग्रेस को क्यों नकार देती है। जब तक इसका मूल्यांकन कर कांग्रेस कमियों को दूर करके जनता का विश्वास हासिल करने में सफल नहीं होगी तब तक प्रदेश में कांग्रेस की वापसी कठिन है।
श्री चतुर्वेदी ने मप्र की स्थापना से लेकर वर्तमान सरकार तक किस पार्टी ने कितना शासन किया का विश्लेषण करते हुए बताया कि मप्र की स्थापना के बाद 1967 तक लगभग 11 वर्ष कांग्रेस की सरकार रही, फिर 1967 में लगभग 17 महीने संयुक्त विधायक दल के नेतृत्व में गोविंद नारायण सिंह की सरकार रही। जिसके बाद फिर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को लगभग 8 वर्षों तक प्रदेश की सत्ता पर काबिज किया। इस बीच देश में इमरजेंसी लागू हुई जिसके बाद प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी। जिसने सन् 1977 से 1980 तक शासन किया। उसके बाद फिर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को 10 वर्षों के लिए सत्ता पर काबिज किया। इसके बाद फिर सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की मप्र में सरकार बनी। यह सरकार भी तीन वर्ष के भीतर ही चली गई। इस प्रकार प्रदेश की स्थापना से लेकर सन् 1992 तक कोई भी गैर कांग्रेसी सरकार मप्र में पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई।
1993 के विधानसभा चुनाव में फिर कांग्रेस को प्रदेश की जनता ने प्रचण्ड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज किया। 1998 में फिर कांग्रेस को मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अगुवाई में जनता ने सत्ता सौंपी लेकिन 2003 के चुनाव से 2013 तक जनता गैर कांग्रेसी भारतीय जनता पार्टी को सत्ता चलाने का बहुमत देती आ रही है।
कांग्रेस को इस बात पर विचार करना होगा कि गैर कांग्रेसी दल के कुछ समय के कार्यकाल के बाद जनता ने कांग्रेस को मौका दिया लेकिन 1993 से 2003 के शासनकाल के दौरान कांग्रेस पार्टी से ऐसी क्या भूलें हुईं जिन्हें जनता आज भी माफ करने को तैयार नहीं है। इस बात का ईमानदारी से आंकलन करना होगा। जिम्मेदारियों को स्वीकार करना होगा और जनता की नाराजगी, उन कमियों को दूर करके विश्वास जीतना होगा।
अगर कांग्रेस ऐसा कर पाने में सफल नहीं होती है तो अगले विधानसभा चुनाव में जनता कांग्रेस को पसंद करेगी कहा नहीं जा सकता। यद्यपि वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, किसान सूखे से जूझ रहा है, प्रदेश सरकार किसानों की समुचित सहायता कर पाने में खरी साबित नहीं हो रही है, महंगाई चरम पर है। प्रदेश सरकार तमाम तरीके के कर आरोपित करके महंगाई को कम नहीं होने देती है। सरकार की कार्यशैली से प्रशासन मस्त है, जनता त्रस्त और नेता मदमस्त होते जा रहे हैं। फिर भी कांग्रेस के प्रति लोगों का रूख पार्टी के लिए चिंतन का विषय है।

