अध्यापक आंदोलन: भोपाल में तहरीर चौक सा होगा नजारा, हम नहीं रुकेंगे

Updesh Awasthee
भोपाल। मप्र में बिना नेता वाले अध्यापक आंदोलन का ऐलान होते ही, एक बार फिर सारे ध्रुव सक्रिय हो गए हैं। सरकार ने अगले 2 महीने तक राजधानी में धरना प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। तमाम मोर्चा एवं संघ के नेताओं की नींदें उड़ गईं हैं और शनिवार शाम ढलते ढलते एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सुकून देने वाला बयान सामने आ गया है परंतु हम एक बार फिर यह जता देना चाहते हैं कि हम तीसरी पंक्ति के सामान्य अध्यापक हैं, जिन्हे अपने स्कूल में पढ़ाना अच्छा लगता है। हम केवल 6वां वेतनमान एवं संविलियन चाहते हैं इससे कम कुछ भी नहीं। 

हम फिर से याद दिलाना चाहते हैं कि यह तीसरी पंक्ति के अध्यापकों की आवाज है। यदि नहीं सुनी गई तो भोपाल में बिल्कुल वही नजारा होगा जो मिस्र के तहरीर चौक में हुआ था। वहां आम जनता तानाशाह के खिलाफ उतर आई थी। कोई नेता नहीं था, लेकिन तानाशाह को सिंहासन छोड़कर भागना पड़ा था। हम राजधानी का कोई भी चौराहा चुनेंगे और जुटना शुरू हो जाएंगे। कोई झंडा नहीं, कोई बैनर नहीं। हाथों में तख्तियां भी नहीं होंगी। सरकार चाहे तो लाठीचार्ज करे या जेलों में ढूंस दे, हमारी संख्या कम नहीं होगी। कुछ साथियों ने सुझाव दिया कि इसे 'अध्यापक पंचायत' नाम दिया जाए तो कुछ का कहना था कि यह 'अवज्ञा आंदोलन' होगा। 24 घंटों में हजारों साथियों ने 'बिना नेता वाले आंदोलन' का समर्थन किया, परंतु हम दौहराना चाहते हैं कि हमारा फोकस केवल हमारी मांगें हैं। पूरी कर दीजिए, तालियां बजाकर लौट जाएंगे। 

हम एक बार फिर यह दोहराना चाहते हैं कि यह ना तो कोई संगठन है और ना ही किसी संगठन का समर्थन या विरोध करता है। यदि संगठन के पदाधिकारी एक अध्यापक होने के नाते शामिल होते हैं तो उनका सदैव स्वागत है। हम किसी भी संगठन का विरोध नहीं करते एवं यह भी स्पष्ट हो चला है कि लगभग सभी संगठनों के सामान्य सदस्य इस जमीनी आंदोलन से जुड़ रहे हैं। मानसिकता मजबूत हो रही है। सरकार यदि अध्यापकों का सम्मान करती है तो बहुत बेहतर है लेकिन यदि वोट बैंक के आगे झुकती है तो वह भी मंजूर है। हम दिखा देंगे कि अध्यापक कभी अकेला नहीं होता। उसके पीछे पूरा एक समाज होता है। वो दर्जनों परिवारों से सीधे जुड़ा होता है और मध्यप्रदेश का माइंड सेट बदल सकता है। 

हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने एक महापंचायत बुलाने का वादा किया है। एक लिखित पत्र तो उन्होंने 15 साल पहले भी दिया था। फिर भी हम उनका स्वागत करते हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि वो स्पष्ट कर दें कि महापंचायत का ऐजेंडा क्या होगा। क्या सिर्फ घोषणाएं होंगी या मुख्यमंत्री आदेश की प्रति साथ लेकर आएंगे। अब हम पीछे नहीं हटने वाले। प्रयास नहीं परिणाम चाहिए। 

मप्र के सभी स्कूल छाप अध्यापक

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