फर्जी मार्कशीट से 22 साल नौकरी करती रही शिक्षिका

Updesh Awasthee
ग्वालियर। शासन से अनुदान प्राप्त गोपाल बाल विद्यालय रामकुई में शिक्षिका की नौकरी करने वाली ममता वैश्य ने फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी पाई थी। इसका खुलासा 1993 में हो गया था, लेकिन मामला कोर्ट व विभाग में लंबित होने के कारण ममता के खिलाफ 22 साल बाद जनकगंज थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है। गोपाल बाल स्कूल में भी 7 साल पहले ताले लग चुके हैं।

गोपाल बाल विद्यालय समिति द्वारा संचालित था। इस समिति के अध्यक्ष हरीकृष्ण गौड थे। जो कि वर्तमान में 74 साल के हैं। हरीकृष्ण गौड़ ने जनकगंज थाने में फर्जी अंकसूची के आधार पर शिक्षिका की नौकरी हासिल करने वाली ममता वैश्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराने के बाद बताया कि ममता की स्कूल में 1987 में शिक्षिका के पद पर नियुक्ति हुई थी। 1990 में विभाग की शिकायत मिली कि ममता निवासी विजयनगर आमखो ने फर्जी अंकसूची के आधार पर नौकरी हासिल की है। जांच में बोर्ड ने इस बात की पुष्टि की कि ममता की 12वीं की अंकसूची फर्जी है। 1993 से शिक्षा विभाग ने इनके वेतन का भुगतान रोक दिया। इसके बाद यह मामला कोर्ट व विभागीय जांच में उलझा रहा। इस बीच स्कूल भी बंद हो गया। विभाग के निर्देश पर शिक्षिका पर यह मामला दर्ज हुआ है।

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