अरुण यादव/भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के कार्यकाल के 10 साल पूरे होने पर आगामी 29 नवंबर को मनाये जाने वाले जश्न व जनसेवा महाकुंभ के आयोजन रद्द होना भाजपा की ही अंतर्कलह है। दबाववश लिए गए इस निर्णय को किसानों के प्रति संवेदना का जामा पहनाना इस वर्ष का सबसे बड़ा राजनैतिक मजाक है?
मात्र अपनी ब्रांडिंग के लिए 1 लाख 61 हजार करोड़ रूपयों के कर्ज बोझ से डूबी राज्य सरकार द्वारा किए जाने वाले इस महंगे आयोजन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के संगठन से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं और काबीना के कई मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को अपनी असहमति दर्ज करायी थी, जिसकी वजह से इन दोनों ने ही मुख्यमंत्री के आमंत्रण को न केवल अस्वीकार कर दिया, बल्कि इसे रद्द करने हेतु भी निर्देशित किया।
यही नहीं इस आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनकी सरकार के 10 वर्षीय कार्यकाल पर जबावी और दस्तावेजी हमला करने के लिए कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत के साथ भंडाफोड़ अभियान के रूप में सामने आने वाली थी, जिसमें निश्चित तौर पर सरकार के चेहरे पर कालिख पुतना तय थी और इसकी जानकारी सरकार तक पहुंच चुकी थी।
इस आयोजन के पीछे मुख्यमंत्री को अपने रिमोट से संचालित करने वाले कतिपय नौकरशाहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी जिसे लेकर अन्य नौकरशाहों का तर्क था कि जब प्रदेश हजारों करोड़ रूपयों के कर्ज बोझ में डूबा हुआ है, रिजर्व बैंक सहित अन्य निजी, वित्तीय स्त्रोतों ने सरकार को अब ऋण देने के लिए मना कर दिया है तब ऐसे आयोजनों की प्रासंगिकता औचित्य से परे हैं। इन सभी दबावों के बाद मुख्यमंत्री को अपने राजनैतिक हठ के आगे झुकना पड़ा है।
- लेखक मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं।

