मर्ज होने वाला हैं राज्य शिक्षा केंद्र और DPI

Updesh Awasthee
भोपाल। मप्र में राज्य शिक्षा केंद्र एवं डीपीआई को मर्ज करने की तैयारियां चल रहीं हैं। राज्यमंत्री दीपक जोशी का मानना है कि 2 अलग अलग आफिस होने के कारण काफी कंफ्यूजन हो जाता है। मंत्री जोशी के इस प्रस्ताव पर ग्रीन सिग्नेचर अभी बाकी हैं। 

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और राज्य शिक्षा केंद्र (RSK) को मर्ज करने का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लेंगे। अगर दोनों एक छत के नीचे आ जाए, तो मैदानी स्तर पर कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत पहली से आठवीं तक की पढ़ाई राज्य शिक्षा केंद्र व 9वीं से 12वीं की तक पढ़ाई और स्थापना का कार्य लोक शिक्षण संचालनालय देखता है। 

दोनों में एक-एक आयुक्त हैं। इससे दोनों का काम अलग-अलग बंटा हुआ है। यही व्यवस्था मैदानी स्तर पर है। जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) 9वीं से 12वीं की अकादमिक गतिविधियां देखते हैं और जिला परियोजना समन्वयक (DPC) पहली से आठवीं की पढ़ाई देखते हैं। जबकि दोनों आयुक्त जिले के दोनों अधिकारियों को आदेश-निर्देश देते रहते हैं, जिससे कई बार काम बिगड़ जाता है और ऊपरी और निचले स्तर पर अधिकारियों में समन्वय नहीं बन पाता है। 

वर्तमान में सुपरविजन करने वाले ज्यादा हैं। कार्य करने वाले कम रहे हैं। दोनों आयुक्तों के अलग-अलग निर्देश जारी होने से भ्रम की स्थिति भी बनी रहती है। इसे देखते हुए राज्य मंत्री स्कूल शिक्षा दीपक जोशी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दोनों विभागों को एक छत के नीचे रखने के लिए प्रस्ताव सौंपा है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण कराया जा रहा है। उनकी मुहर इस प्रस्ताव लगी, तो दोनों विभाग एक छत के नीचे आ जाएंगे।

आयुक्त एक होने से समय पर होंगे काम
मुख्यमंत्री को सौंपे गए प्रस्ताव में बताया गया है कि दोनों विभाग एक छत के नीचे होंगे। इसमें आयुक्त एक होगा। एक आयुक्त होने से सभी योजनाएं और काम एक ही व्यक्ति के हाथ में रहेंगे। जिससे काम समय पर होंगे और जिला या ब्लाक स्तर पर तकरार की स्थिति नहीं बनेगी। वहीं एक ही कार्य के लिए दो अधिकारियों की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अधिकारियों की जिम्मेदारी कम होगी, तो मॉनीटरिंग सहित अन्य कार्यों में तेजी आएगी।

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