भोपाल। यूं तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह मप्र में कारखानों के लिए बड़े बड़े भाषण और रोड शो दिया करते हैं, लेकिन असलियत यह है कि यहां लगने वाले मोटे मोटै टैक्स के डर से कोई भी कंपनी यहां बड़े प्रोजेक्ट नहीं लगाती। एशिया में सबसे ज्यादा गैस उत्पादन करने वाली कंपनी गेल ने भी इसी के चलते मप्र में नए प्रोजेक्ट नहीं लगाए हैं।
इसका खुलासा खुद गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के मुख्य प्रबंध संचालक बीसी त्रिपाठी ने किया। वो शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने के लिए मंत्रालय आए थे। उन्होंने कहा कि हम राज्य के सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले संस्थाओं में से एक हैं। इसके लिए सरकार ने हमे अवार्ड भी दिया है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अंटोनी जेसी डिसा से गेल के प्रकरण में पूरी जानकारी देने को कहा।
इस अवसर पर मुख्य प्रबंध संचालक ने कहा कि हम सीएनजी का अच्छा खासा उत्पादन कर रहे हैं। दिल्ली की तर्ज पर मप्र सरकार यदि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सीएनजी अनिवार्य कर दे तो, इससे प्रदूषण भी कम होगा। इसके लिए राज्य सरकार को कड़ा निर्णय लेना होगा। इस पर उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि इसे एक साथ लागू करना संभव नहीं होगा। वहीं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसके मिश्रा ने कहा कि गेल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में अपने फिलिंग स्टेशन ज्यादा से ज्यादा खोल दे। इससे जो सीएनजी लेना चाहेगा वह ले लेगा।
गेल के अधिकारियों ने कहा कि हम केवल सीएनजी का उत्पादन करते हैं। फिलिंग सेंटर खोलने का काम संबंधित एजेंसी और राज्य सरकार पर निर्भर करता है। वैसे भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सीएनजी पर नहीं आने तक फिलिंग सेंटर खोलने का मतलब नहीं है। उल्लेखनीय है कि गेल इंडिया साढ़े चार हजार करोड़ का टर्नओवर है, प्रदेश के 14 जिलों में इनके विभिन्न् प्रोजेक्ट चल रहे हैं। भारत का सबसे बड़ा एलपीजी उत्पादन प्लांट प्रदेश में है, जिसकी क्षमता छह लाख 50 हजार टन है। एशिया का सबसे बड़ा गैस प्रसंस्करण प्लांट भी मध्यप्रदेश में है।

