अनूपपुर, 18 जुलाई 2026: मोबाइल में वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन करके बकवास तो कोई भी कर लेता है लेकिन विधायक जैसे संवैधानिक पद पर बैठकर आरोप लगाने से पहले, उसके आधार के बारे में पुख्ता जानकारी एकत्रित कर लेना चाहिए। पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को शुक्रवार को आरोपों से भरा बम प्लांट किया था। मामले को राम मंदिर चंदा चोरी से जोड़ दिया था लेकिन अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने 24 घंटे के भीतर विधायक द्वारा प्लांट किए गए बम का पोस्टमार्टम कर डाला। शनिवार को Physical verification Report जारी कर दी गई है।
1. श्री नर्मदा उद्गम ट्रस्ट के आभूषणों का भौतिक सत्यापन संपन्न, एक तोला की गड़बड़ी नहीं मिली
अनूपपुर जिले के अमरकंटक स्थित श्री नर्मदा उद्गम ट्रस्ट के सोने-चांदी के आभूषणों का भौतिक सत्यापन कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली के निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रक्रिया के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पुष्पराजगढ़, श्री वसीम अहमद भट्ट की अध्यक्षता में एक जांच दल का गठन किया गया था, जिसने अमरकंटक थाना परिसर में सुरक्षित रखे गए आभूषणों का सूचीवार मिलान किया।
Anuppur Collector Debunks MLA's Claims in 24 Hours
सत्यापन के बाद दल ने प्रतिवेदन दिया कि सभी आभूषण सुरक्षित, पूर्ण और सूची के अनुसार यथावत हैं। यह कार्यवाही नगर परिषद अमरकंटक के अधिकारियों, थाना प्रभारी और ट्रस्ट के अधिकृत पुजारी की उपस्थिति में पारदर्शिता के साथ पूरी की गई। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने नर्मदा मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं और वीडियो में स्वयं देख एवं सुन सकते हैं, विधायक ने क्या-क्या कहा था। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि एक आम आदमी और विधायक में यही अंतर होता है। सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने वाले ट्रेंडिंग टॉपिक पर कुछ भी बोलते रहते हैं, लेकिन एक विधायक कोई भी आरोप लगाने से पहले तथ्य एकत्रित करता है। विधायक का अपना नेटवर्क होता है और संवैधानिक शक्ति भी होती है।
2. कलेक्टर हर्षल पंचोली ने जिले के अधिकारियों के बीच किया कार्य विभाजन
प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री हर्षल पंचोली ने जिले के अधिकारियों के मध्य कार्य विभाजन के नए आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार, कलेक्टर स्वयं भू-राजस्व संहिता, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और जिला निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार संभालेंगे। अपर कलेक्टर (विकास) श्रीमती अर्चना कुमारी को विकास शाखा, पंचायत, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग जैसे महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व दिए गए हैं। इसके अलावा, विभिन्न अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) को उनके संबंधित क्षेत्रों जैसे पुष्पराजगढ़, जैतहरी, कोतमा और अनूपपुर के लिए राजस्व और दंडाधिकारी शक्तियां सौंपी गई हैं।
3. जिला पंचायत सीईओ का सुदूरवर्ती ग्रामों में सघन दौरा
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती अर्चना कुमारी ने जिले के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायतों जैसे तरंग, खमरौध, अहिरगंवा और मिट्ठू महुआ का भ्रमण कर विकास कार्यों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नल जल योजना, पीएम आवास, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण और स्वच्छ भारत अभियान के तहत व्यक्तिगत शौचालय सर्वे की प्रगति देखी। सीईओ ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और मुर्गी पालन कर रही महिलाओं से चर्चा कर उन्हें 'मुर्गी लेयर शेड' निर्माण की स्वीकृति देने का आश्वासन भी दिया।
4. ममता बालगृह में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
अनूपपुर स्थित ममता बालगृह का न्यायिक अधिकारियों द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया, जिसमें बच्चों के आवास, भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया गया। इस अवसर पर आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में न्यायाधीशों ने बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा के अधिकार (RTE) और विशेष रूप से 'साइबर सुरक्षा' के बारे में जागरूक किया। न्यायिक अधिकारियों ने बालगृह प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजा जाए और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाया जाए।
5. "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान
जन अभियान परिषद जिला कार्यालय अनूपपुर में नवांकुर संस्थाओं और परामर्शदाताओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता संभाग समन्वयक श्री भीम सिंह ने की। बैठक में संस्थाओं द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की समीक्षा की गई और आगामी गतिविधियों को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। बैठक के पश्चात "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत सामूहिक पौधारोपण किया गया, जहाँ सभी उपस्थित सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण और पौधों की देखभाल का संकल्प लिया।
जमुना में चोरी के कोयले से धधक रहे ईंट भट्टे!
अनूपपुर। भालूमाड़ा थाना के जमुना क्षेत्र में संचालित कुछ ईंट भट्टों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में संचालित कई ईंट भट्टों तक बड़ी मात्रा में चोरी का कोयला पहुंचाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि हरद रेलवे साइडिंग तथा बंद पड़ी खदानों से अवैध रूप से कोयला निकालकर उसे दलालों और कथित कोयला चोरों के माध्यम से ईंट भट्टों तक पहुंचाया जाता है। यही कारण है कि क्षेत्र में लंबे समय से कोयला चोरी का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। प्रतिदिन चोरी का कोयला अलग-अलग माध्यमों से ईंट भट्टों तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए कथित तौर पर अलग-अलग लोगों को लगाया गया है, जो बंद खदानों और रेलवे क्षेत्र से कोयला इकट्ठा कर बाइक और साइकिल अन्य साधनों से भट्टों तक पहुंचाते हैं। इसके बाद उसी कोयले से ईंट पकाने का काम किया जाता है।
गांव के समीप संचालित हो रहे ईंट भट्टे
जमुना बस्ती के आसपास आबादी से सटे क्षेत्रों में भी ईंट भट्टे संचालित होने की बात सामने आ रही है। भट्टों से निकलने वाला धुआं और राख वातावरण को प्रदूषित कर रही है। इससे आसपास रहने वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यदि ईंट भट्टे निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं तो संबंधित विभाग को तत्काल जांच करनी चाहिए।
कोयला चोरी रोकने में नाकाम व्यवस्था?
क्षेत्र में चर्चा है कि हरद रेलवे साइडिंग और बंद पड़ी खदानों से लगातार कोयला चोरी हो रही है। इसके बावजूद चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। यदि नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की जाए तो इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है। लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की है, लेकिन कोयला चोरी का सिलसिला लगातार जारी रहने से उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
ईंट भट्टों के संचालन के लिए क्या हैं नियम?
ईंट भट्टा संचालित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है।राजस्व विभाग एवं स्थानीय निकाय से भूमि उपयोग संबंधी अनुमति आवश्यक होती है। भट्टा आबादी, स्कूल, अस्पताल तथा सार्वजनिक स्थानों से निर्धारित दूरी पर होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। ईंधन के रूप में प्रतिबंधित या चोरी की सामग्री का उपयोग पूरी तरह अवैध है। श्रम कानूनों का पालन, मजदूरों की सुरक्षा तथा बाल श्रम निषेध के नियमों का पालन भी आवश्यक होता है। यदि कोई ईंट भट्टा इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध जुर्माना, संचालन पर रोक तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी तथा पुलिस संयुक्त रूप से जांच अभियान चलाएं। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि सभी ईंट भट्टे निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि सरकारी संपत्ति की चोरी पर रोक लगे, पर्यावरण की रक्षा हो सके और वैध कारोबार करने वालों के साथ अन्याय न हो। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रभावी कार्रवाई से ही क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे इस कथित अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट: वेद प्रकाश शर्मा, एडिटिंग: उपदेश अवस्थी।

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