अरुण जेटली ने की थी हजारों मासूमों के हत्यारे विदेशी व्यापारी की वकालत

Updesh Awasthee
भोपाल। रात को एक मुस्कुराता हुआ शहर चैन की नींद सोया था और सुबह वही भोपाल लाशों का शहर बन चुका था। हर घर में लाशें थीं। यह भोपाल गैसकांड था और इसका जिम्मेदार था अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कंपनी का अध्यक्ष, वारेन एंडरसन। ये तो सब जानते ही हैं कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी ने उसे भारत से फरार होने में मदद की। मप्र के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने उसे हिरासत से मुक्त कर सरकारी विमान से दिल्ली भेजा परंतु ये बहुत कम लोग जानते हें कि भाजपा नेता अरुण जेटली ने हत्यारे एंडरसन की वकालत की। जिसके कारण उसे कभी वापस भारत नहीं लाया जा सका। इतना ही नहीं कानून मंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने एंडरसन की फाइल को लगभग क्लोज ही कर दिया था।

द हिंदू ने छापा है कि भोपाल के गैस पीड़ितों के साथ जो अन्याय हुआ है, उसके लिए कांग्रेस और बीजेपी के नेता बराबर के जिम्मेदार हैं। बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेता, अरुण जेटली जब कानून मंत्री थे, तो उन्होंने भी एंडरसन के बारे में वही कहा था, जो कहने के आरोप में बीजेपी वाले कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं।

कानून मंत्री बनने के बाद भी मदद की
द हिंदू ने छापा है कि 25 सितंबर को 2001 को कानून मंत्री के रूप में अरुण जेटली ने फाइल में लिखा था कि एंडरसन को वापस बुला कर उन पर मुकदमा चलाने का केस बहुत कमजोर है। जब यह नोट अरुण जेटली ने लिखा, उस वक्त उनके ऊपर कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री पद की जिम्मेदारी थी। यही नहीं, उस वक्त देश के अटार्नी जनरल के पद पर देश की सर्वोच्च योग्यता वाले एक वकील, सोली सोराबजी मौजूद थे। सोराबजी ने अपनी राय में लिखा था कि अब तक जुटाया गया साक्ष्य ऐसा नहीं है, जिसके बल पर अमरीकी अदालतों में मामला जीता जा सके। अरुण जेटली के नोट में जो लिखा है, उससे एंडरसन बिलकुल पाक-साफ इंसान के रूप में सामने आता है। अरुण जेटली ने सरकारी फाइल में लिखा है कि यह कोई मामला ही नहीं है कि मिस्टर एंडरसन ने कोई ऐसा काम किया, जिससे गैस लीक हुई और जान माल की भारी क्षति हुई।

एंडरसन को निर्दोष लिखा, केस क्लोज करवा दिया 
जेटली ने लिखा है कि कहीं भी कोई सबूत नहीं है कि मिस्टर एंडरसन को मालूम था कि प्लांट की डिजाइन में कहीं कोई दोष है या कहीं भी सुरक्षा की बुनियादी जरूरतों से समझौता किया गया है। कानून मंत्री, अरुण जेटली कहते हैं कि सारा मामला इस अवधारणा पर आधारित है कि कंपनी के अध्यक्ष होने के नाते एंडरसन को मालूम होना चाहिए कि उनकी भोपाल यूनिट में क्या गड़बड़ियां हैं। जेटली के नोट में साफ लिखा है कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि अमरीका में मौजूद मुख्य कंपनी के अध्यक्ष ने भोपाल की फैक्टरी के रोज के कामकाज में दखल दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि केस बहुत कमजोर है लेकिन अगर मामले को आगे तक ले जाने की पॉलिसी बनायी जाती है तो केस दायर किया जा सकता है। जाहिर है, उस वक्त की सरकार ने कानून के विद्वान अपने मंत्री, अरुण जेटली की राय को जान लेने के बाद मामले को आगे नहीं बढ़ाया।
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