जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने व्यापमं फर्जीवाड़े की जांच एजेंसी एसटीएफ को सख्त निर्देश दिया कि वह पीएमटी के साथ-साथ व्यापमं द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की भी जांच करे। एसटीएफ इस संदर्भ में वही लॉजिक एप्लाई करे जो पीएमटी फर्जीवाड़े की जांच में अपनाया गया है।
इसके जरिए सामने आने वाली जानकारियों की रिपोर्ट सबसे पहले एसआईटी को दी जाए। इसके आधार पर हाईकोर्ट मॉनीटरिंग करके आगामी दिशा-निर्देश जारी करेगा।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश अजय माणिकराव खानविलकर व जस्टिस आलोक आराधे की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सबसे पहले एसआईटी/एसटीएफ द्वारा मंगलवार को दो सीलबंद लिफाफों में पेश की गई आठवीं रिपोर्ट पर गौर किया गया। इसके बाद कोर्ट ने अलग-अलग बिन्दुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए।
500 गिरफ्तारियां शेष, 168 टीमें भेजीं
हाईकोर्ट ने एसआईटी/एसटीएफ की रिपोर्ट में पाया कि फिलहाल व्यापमं फर्जीवाड़े में 500 गिरफ्तारियां शेष हैं, जिनके लिए विभिन्न दिशाओं में 168 टीमें रवाना की गई हैं। कोर्ट ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लेकर एसटीएफ को गिरफ्तारी प्रक्रिया में तेजी लाने निर्देश दे दिया।
एसटीएफ चीफ एसआईटी के साथ मीटिंग करें
हाईकोर्ट ने एसटीएफ चीफ सुधीर शाही को एसआईटी के साथ मीटिंग करने का भी निर्देश दिया। इस ज्वाइंट मीटिंग के जरिए वे लंबित समस्याएं हल की जाएं जो एसटीएफ व एसआईटी के बीच कम्युनिकेशन-गेप की वजह से पैदा हो गई हैं।
क्राइम नंबर वाइज जांच का परीक्षण किया जाए
हाईकोर्ट ने एसटीएफ चीफ को यह निर्देश भी दिया कि वे व्यापमं फर्जीवाड़े को लेकर क्राइम नंबर वाइज जांच रिपोर्ट का सूक्ष्मतापूर्वक परीक्षण करें। इसके जरिए यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है या नहीं? इसके बाद एसआईटी को इस सिलसिले में विधिवत सूचित किया जाए। हाईकोर्ट ने इसी के साथ मामले की अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित कर दी।

