भोपाल। पिछले दिनों भोपाल में आए भूकंप के झटकों का असर अब दिखाई देने लगा है। पुराने भवन जो दरक गए हैं, अब गिरने लगे हैं। पुराना शहर स्थित चौकी इमामबाड़ा में सोमवार शाम करीब 100 साल पुराना दो मंजिला मकान गिर गया। हालांकि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन मकान मालिक का सामान मलबे में दब गया।
हादसे के कारण क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों को लगा कि भूकंप के कारण मकान गिरा है। इस कारण आसपास के लोग घरों से बाहर आ गए थे। इस मकान को नगर निगम ने जर्जर घोषित कर रखा था। भवन स्वामी को नोटिस भी दिया था, लेकिन मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई। मकान सैफिया कॉलेज रोड पर फरीदू खां की मस्जिद के पीछे परवेज हसन का दो मंजिला मकान रात करीब 8 बजे गिर गया। जिस वक्त मकान गिरा, उस समय भवन स्वामी परवेज परिवार सहित पड़ोस में गए हुए थे। इसके बाद भी मकान में 7 लोग मौजूद थे।
ये सभी किराएदार हैं, लेकिन मकान के जिस हिस्से में ये लोग थे, मकान का वह हिस्सा नहीं ढहा। प्रत्यक्षदर्शी शाहिद खान ने बताया कि मकान में परवेज मियां के साथ उनकी वृद्ध मां भी रह रही थीं। हादसे के ठीक पहले सभी को घर बाहर निकल गए।
इसके कुछ देर बाद ही जोरदार आवाज के साथ मकान ढह गया। आसपास धूल का गुबार उठ गया और सड़क पर चल रहे लोगों में भगदड़ मच गई। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। घटना के करीब आधा घंटा के बाद फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंच गई। हालांकि हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
जर्जर मकान का आधा हिस्सा ही गिरा है। इससे मकान और भी खतरनाक हो गया है। ऐसे में नगर निगम ने मलबा हटाने के बाद बाकी हिस्सा ढहाने की तैयारी कर रहा है। रात में जेसीबी की मदद से मकान का बाकी हिस्सा ढहाया गया।
300 भवन जर्जर
निगम ने शहर में करीब 300 जर्जर भवनों चिन्हित कर नोटिस देने की औचारिकता पूरी की है। यह नोटिस भी पिछले साल जारी किए गए थे, लेकिन पूरे साल कार्रवाई एक पर भी नहीं हुई। ऐसे में बारिश में हादसे की आशंका है। जर्जर भवन तोड़ने की अंतिम कार्रवाई 6 जुलाई, 2013 को चौकी इमामबाड़ा में की गई थी। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। पिछले साल भी निगम ने लगभग 300 जर्जर भवनों को चि-ति किया था।
इन्हीं को फिर से नोटिस देने की तैयारी चल रही है। इसमें मकान मालिकों को खुद जर्जर भवन तोड़ने को कहा जाएगा। निगम ने कुछ सरकारी इमारतों को भी जर्जर घोषित किया। इनमें दफ्तर लग रहे हैं और लोगों का आना-जाना बना रहता है। इनमें पुराना आरटीओ कार्यालय और सड़क परिवहन निगम का दफ्तर भी शामिल है।

