भोपाल में हाईकोर्ट बेंच के लिए प्रक्रिया शुरू

Updesh Awasthee
जबलपुर। भोपाल में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच के गठन की मांग पर चर्चा के लिए प्रशासनिक कमेटी का गठन कर दिया गया है। प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (ज्यूडीशियल) मनोहर ममतानी के हस्ताक्षर से 15 अप्रैल को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया।

कमेटी में मुख्यपीठ जबलपुर के प्रशासनिक न्यायाधीश राजेंद्र मेनन, खंडपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधीश यूसी माहेश्वरी और खंडपीठ इंदौर के प्रशासनिक न्यायाधीश पीके जायसवाल को रखा गया है। कमेटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी कितने दिनों में यह रिपोर्ट देगी यह अभी तय नहीं है।

गौरतलब है कि राजधानी के अधिवक्ता संगठन लंबे समय से भोपाल में हाईकोर्ट की बेंच की मांग कर रहे थे। कुछ दिनों पहले एमपी हाईकोर्ट भोपाल बेंच ऐस्टेब्लिशमेंट केंपेन कमेटी ने भी ऐसी मांग की थी। इसके बाद प्रशासनिक कमेटी का गठन किया गया।

इन पर विचार करेगी कमेटीः
तीन सदस्यीय कमेटी मांगों के तहत विचार करेगी कि भोपाल में हाईकोर्ट बेंच की कितनी आवश्यकता है।
भोपाल में बेंच नहीं होने के कारण मुकदमे और वादी-प्रतिवादी किस तरह प्रभावित होते हैं।
यह भी देखा जाएगा कि सर्किट बेंच बनाने से क्या हाईकोर्ट से मुकदमों का बोझ कम होगा।
हाईकोर्ट की पहले से ही इंदौर और ग्वालियर में बेंच हैं, ऐसे में विखंडन के प्रभाव पर भी विचार होगा।

आगे क्याः
कमेटी सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद चीफ जस्टिस को रिपोर्ट करेगी।
यदि कमेटी ने सर्किट बेंच की अनुसंशा की तो हाईकोर्ट राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजेगी।
राज्य सरकार केंद्र को और केंद्र राष्ट्रपति को प्रस्ताव भेजेगा।
यह प्रक्रिया पूरी होते ही सर्किट बेंच गठित कर दी जाएगी।

विरोध में उतरा बार एसोसिएशन, सोमवार को तय होगी रणनीतिः
भोपाल बेंच के लिए प्रशासनिक कमेटी के गठन की जानकारी लगते ही बार एसोसिएशन जबलपुर ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। हाईकोर्ट बार अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्शमुनि त्रिवेदी ने सवाल उठाया है कि एमपी हाईकोर्ट भोपाल बेंच ऐस्टेब्लिशमेंट केंपेन कमेटी जैसी अनाधिकृत व कथित समिति की मांग को इतना महत्व क्यों दिया गया? हाईकोर्ट बार के सचिव मनीष तिवारी ने बताया कि पूर्व में इंदौर व ग्वालियर खंडपीठ की शक्ल हाईकोर्ट के दो टुकड़े किए जा चुके हैं। लिहाजा, राजधानी भोपाल को सर्किट बेंच या तीसरी खंडपीठ दिए जाने की साजिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सोमवार को इस संबंध में अधिवक्ता संघों की संयुक्त कार्यकारिणी की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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