विवाद में उलझा वेदांत अस्पताल, भीतर बंद हो गए मरीज

Updesh Awasthee
इंदौर। टावर चौराहा स्थित वेदांत अस्पताल विवाद में उलझ गया और इस विवाद का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। यहां कुछ लोगों ने अस्पताल के मेनगेट को स्ट्रेचर और गमले लगाकर बंद कर दिया। करीब पौन घंटे मरीज परेशान होते रहे। बाद में पुलिस ने आवाजाही चालू करवाई।

अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. आशीष अग्रवाल के मुताबिक अस्पताल की इमारत तीन साल पहले उन्होंने गोपाल कुकरेजा से किराए पर ली थी। यह एग्रीमेंट 9 साल के लिए था। दिसंबर 2014 में कुकरेजा ने बिल्डिंग का सौदा आनंद चोथवानी को कर दिया।

चोथवानी ने इमारत के साथ ही पौने पांच करोड़ रुपए में अस्पताल का भी सौदा कर लिया। शर्तों के मुताबिक चोथवानी को 15 जनवरी तक पेमेंट करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पर हमने अस्पताल फिर से चालू कर लिया। इस बीच बिल्डिंग को लेकर अन्य विवाद भी सामने आए।

शनिवार सुबह करीब 7 बजे कुकरेजा का बेटा समीर साथियों के साथ अस्पताल पहुंचा और मेनगेट को स्ट्रेचर और गमले लगाकर बंद कर दिया। हमने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक घटना के वक्त अस्पताल में 8 गंभीर मरीज भर्ती थे। इनमें 5 साल का बच्चा भी शामिल है जिसका ऑपरेशन शनिवार सुबह ही किया गया था। एक नवजात भी था जिसका वजन सिर्फ डेढ़ किग्रा है। घटना से मरीज दहशत में आ गए। तीन दिन पहले भी पुलिस को शिकायत की थी।

बेच चुके सेटअप
विवाद की कोई बात नहीं है। डॉ. अग्रवाल कहानी बनाकर बता रहे हैं। वे अस्पताल का सेटअप बेच चुके हैं। यह सौदा आनंद चोथवानी से हुआ था। हमारा डॉ. अग्रवाल से विवाद नहीं है। शनिवार की घटना से हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
गोपाल कुकरेजा

पेमेंट को तैयार
वेदांत अस्पताल हमने खरीदा है। हम पेमेंट को तैयार हैं। 15 जनवरी को हमने पजेशन ले लिया था, लेकिन डॉ. अग्रवाल ने पजेशन वापस ले लिया। शनिवार को हमारा कोई विवाद नहीं हुआ। हम पेमेंट करने को तैयार हैं।
आनंद चोथवानी

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