रवि गुप्ता/छतरपुर। मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी संजय कश्तवार की अदालत ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री, लिपिक सहित चार कर्मचारियों के खिलाफ सरकारी खजाने का गबन करने के अपराध का संज्ञान लिया है। कार्यपालन यंत्री सहित चारों कर्मचारियों पर लाखों रुपये हड़पने के लिये फर्जी कार्रवाई करने का आरोप था। सीजेएम कोर्ट ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।
एडव्होकेट लखन राजपूत ने जानकारी देते हुये बताया कि पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन ईई वीसी चौहान ने 17 नवम्बर 2011 को सचिव मध्य प्रदेश शासन लोक निर्माण विभाग बल्लभ भवन मंत्रालय भोपाल के आदेश पर पुलिस थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कार्यपालन यंत्री आरके वर्मा एवं कर्मचारी विजयांत अग्रवाल, सुरेश कुमार चतुर्वेदी, अरविंद कुमार मातेले द्वारा शासकीय राशि गबन करने के आशय से फर्जीवाड़ा किया गया है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना करने के बाद मामले को कमजोर पाया और साक्ष्य के अभाव में तत्कालीन एसपी के माध्यम से खात्मा सीजेएम संजय कश्तवार की अदालत में पेश किया। न्यायाधीष श्री कश्तवार की अदालत ने मामले का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पाया कि तत्कालीन सहायक यंत्री आरके वर्मा एवं कर्मचारी विजयांत अग्रवाल, सुरेश कुमार चतुर्वेदी, अरविंद कुमार मातेले ने लाखों रुपये शासकीय राशि का गबन करने के आशय से छल, कपट करके फर्जी क्रय आदेश बनाये जो गंभीर अपराध है।
कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री आरके वर्मा, कर्मचारी विजयांत अग्रवाल, सुरेश कुमार चतुर्वेदी, अरविंद कुमार मातेले के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 409, 511, 120बी/34 तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। मामला दर्ज होने की जानकारी मिलते ही गिरफ्तारी से बचने के लिये कार्यपालन यंत्री सहित चारों आरोपी विभाग से नदारत हो गये।
पुलिस की कार्यवाही को कोर्ट ने माना गलत
सीजेएम श्री कश्तवार की अदालत ने इस मामले की विवेचना करने वाले कोतवाली के तत्कालीन थाना प्रभारी और पुलिस के बड़े अधिकारियों द्वारा इस फर्जीवाड़े मामले में सही कार्यवाही करना नही पाया। मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ पक्के सबूत होने पर भी खात्मा लगाने के लिये पुलिस ने मामला अदालत में पेश किया है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यवाही को गलत मानकर खात्मा लगाने से इंकार कर दिया।
ईई ने आरोपियों को बचाने का किया प्रयास
पीडब्ब्ल्यूडी के ईई वीसी चौहान को इस फर्जीवाड़े की जानकारी थी। श्री चौहान ने कार्यपालन यंत्री आरके वर्मा सहित अपराध में सामिल चारो कर्मचारियों को बचाने के लिये पुलिस की मदद नही की और मामले में खात्मा लगाने के लिये अपनी सहमति दी थी।
पीडब्ल्यूडी करता है घटिया काम: अदालत
सीजेएम की अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी करते हुये लिखा है कि पीडब्ल्यूडी के कार्य की संस्कृति बिना काम कराये लोकधन का आहरण करना है और इतने नीचे स्तर का काम कराना है जिससे कार्य में आबंटित राशि और निर्माण में लगे प्राकृतिक संसाधन एवं श्रम व्यथ हो जाये। इस तरह की संस्कृति पीडब्ल्यूडी से निकलकर ग्राम पंचायत, मनरेगा और अन्य विभागों में भी पहुॅच गई है। जो सारी व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।
