भोपाल। निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही की हालत पतली है। होर्डिंग्स पर भाजपा का शक्तिप्रदर्शन जारी है तो कांग्रेस का प्रचार अभियान दिखाई ही नहीं दे रहा, लेकिन यदि बागियों की बात करें तो भाजपा को खतरा ज्यादा है। ताज्जुब तो इस बात का है कि भाजपा की असलियत कांग्रेस के लीडर्स को भी पता है बावजूद इसके वो एग्रेसिव प्रचार अभियान शुरू नहीं कर पाए, एक तरह से वाकओवर देते दिखाई दे रहे हैं। अखबारों में छप रहीं कुछ पक्षपाती खबरों पर ध्यान ना दें तो जमीनी हकीकत रूह कंपा देने वाले संदेश दे रही है। इस चुनाव में भोपाल की जमीनी हकीकत क्या है जानने के लिए पढ़िए पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया की यह रिपोर्ट:—
वार्ड 24 - कांग्रेस प्रत्याशी शबिस्ता सुल्तान के साथ पार्टी के वाहिद लश्करी से भी खतरा है। यही स्थिति भाजपा प्रत्याशी बृजुला सचान के साथ है। यहां भाजपा से टिकट न मिलने पर अंकित राठौर भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
वार्ड 25 - इस वार्ड भाजपा नेता और पूर्व पार्षद अशोक पांडे प्रतिनिधित्व करते रहे हैंै। पांडे निधन के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी पत्नी को टिकट देने की पैरवी की। लेकिन मंत्री गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद टिकट सरोज जैन को मिल गया। बाणगंगा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना पाटिल जातिगत समीकरण से मुकाबले को रोचक बना रही हैं।
वार्ड 26- इस वार्ड से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी सुमित उइके और भाजपा प्रत्याशी संतोष उइके रिश्तेदार भी हैं। कांग्रेस को यहां संगठन की कमी खल रही है तो भाजपा को बागी संतोष मंडराई से भी खतरा है।
वार्ड 27- यहां से भाजपा ने आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने युवा नेता प्रदीप मोनू सक्सेना को मैदान में उतारा है। सक्सेना डैमेज कंट्रोल के लिए बागी राजा भैया का समर्थन हासिल कर लिया है। दोनों धुंआधार प्रचार कर रहे हैं।
वार्ड 28- इस वार्ड में भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी गोरेवर को संगठन का भरोसा है, तो कांग्रेस प्रत्याशी रिंकू दिलवारिया घर-घर के संपर्क के जरिए जीत हासिल करना चाहती हैं। दाेनों प्रत्याशी अंबेडकर नगर में जाति आधार पर वोट बैंक को साधने की कोशिश में लगे हुए हैं।
वार्ड 29- भाजपा प्रत्याशी वंदना परिहार और कांग्रेस प्रत्याशी संतोष कसाना दोनों ही पूर्व पार्षद रह चुकी हैं। दोनों को एंटी इनकंबेंसी का डर है।
वार्ड 30- पूर्व पार्षद रामेश्वर राय दीक्षित की पत्नी सुधा दीक्षित को भाजपा ने मौका दिया है। वे निर्दलीय महेश यादव व शिवम त्रिवेदी से अपने वोट बैंक को बचाने की कोशिश कर रही हैं। अभिनेत्री से नेता बनी कांग्रेस प्रत्याशी सीमा सक्सेना के प्रचार में ग्लैमर का तड़का भी लग रहा है।
वार्ड 31- भाजपा में इसी वार्ड के लिए टिकट वितरण में खासा घमासान हुआ था। मंत्री गुप्ता ने अपने समर्थक मनोज जाट को टिकट तो दिलवाया है। कांग्रेस प्रत्याशी अमित शर्मा और जाट में कड़ा मुकाबला है। अमित ने होर्डिंग के जरिए जमकर प्रचार अभियान छेड़ रखा है, तो जाट जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।
वार्ड 32- यहां त्रिकोणीय संघर्ष है। पूर्व निगम अध्यक्ष रामदयाल प्रजापति ने यहां भाजपा से टिकट तो ले लिया है, लेकिन उन्हीं की पार्टी के बागी प्रत्याशी जगदीश यादव भी चुनाव मैदान में है। कांग्रेस प्रत्याशी हिमांशु धाकड़ भी अपने स्थानीय होने का प्रचार कर रहे हैं।
वार्ड 33 - यहां रीवा और बिहार मूल के लोगों का बाहुल्य है। कांग्रेस के बागी प्रत्याशी और पूर्व पार्षद सीएम पटेल रीवा और बिहार मूल के वोटर्स को साधने में जुटे हुए हैं। भाजपा में सामान्य सीट से एससी वर्ग के शंकर मकोरिया को मौका मिला है। जबकि कांग्रेस ने संतोष परिहार पर भरोसा जताया है।
वार्ड 46- उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता के भांजे आशीष अग्रवाल यहां से भाजपा प्रत्याशी है, जबकि कांग्रेस से जिलाध्यक्ष पीसी शर्मा के समर्थक योगेंद्र गुड्डू चौहान चुनाव मैदान में है। दोनों के बीच होर्डिंग वार जारी है।
वार्ड 47- भाजपा ने राजेश खटीक पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने पूर्व पार्षद राजू गुजरे को टिकट दिया है। गुजरे की पत्नी सरोज भी पिछली बार यहां से पार्षद थी। भाजपा की परेशानी बागी संतोष कड़वे से भी हैं।
