जरा सोचिए, यदि चुनाव इस तरह से हों तो कैसा रहेगा

हैदराबाद। पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त जेएम लिंगदोह की नजर में मौजूदा चुनाव प्रक्रिया में ढेरों खामियां हैं। उन्होंने जन प्रतिनिधि बनने के लिए प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने वाली वर्तमान निर्वाचन प्रक्रिया की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया है। लिंगदोह ने प्रत्याशियों के बजाय पार्टियों के चुनाव लड़ने की पैरवी की है। उनका कहना है, 'उम्मीदवार आधारित मौजूदा निर्वाचन प्रणाली की बजाय चुनावों में पार्टियों द्वारा हासिल मत प्रतिशत के अनुसार सत्ता में आनुपातिक प्रतिनिधित्व देने वाली व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।'

खर्च सीमा बेकार
चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा खर्च सीमा तय करने की कार्रवाई को भी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने बेकार करार दिया है। बकौल लिंगदोह, 'यह व्यवस्था एक मजाक बन कर रह गई है क्योंकि प्रत्याशी निर्धारित खर्च सीमा से ज्यादा व्यय करते हैं और कागज में उसे कम करके दिखाते हैं। प्राय: हर उम्मीदवार के लिए ऐसा करना आम बात हो गई है। उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने वाली मौजूदा व्यवस्था का विरोध करते हुए उन्होंने कहा, 'जैसी मतदान प्रणाली हमारे यहां है, उसमें इसकी (खर्च की सीमा तय करने) कोई प्रासंगिकता नहीं है। यह पूरी तरह बेकार हो गई है।

आनुपातिक प्रणाली से व्यय होगा कम
इस संवाददाता से बातचीत करते हुए उन्होंने आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली व्यवस्था लागू करने की वकालत की। लिंगदोह के अनुसार, 'प्रत्याशी जब चुनाव मैदान में नहीं होंगे तो उतना पैसा खर्च नहीं होगा, जितना आजकल व्यय किया जा रहा है। सियासी दल आपस में चुनाव लड़ेंगे। जो जितना वोट पाएगा, उसी प्रतिशत के आधार पर सत्ता में उसकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।' पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, 'इस व्यवस्था से चुनाव में धनबल के बढ़ते प्रयोग पर लगाम कसी जा सकती है। उन्होंने कहा, 'यह व्यवस्था पूरी तरह कारगर होगी, इसे लागू करने की कोशिश करनी चाहिए।

ऑनलाइन वोटिंग सही नहीं
एक सवाल के जवाब में लिंगदोह ने ऑनलाइन वोटिंग का विरोध किया। कहा, 'हमारे यहां पहले से ही चुनावों में बड़ी धोखाधड़ी होती है। ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली से तो यह कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगी।' चुनावों के पहले सांप्रदायिक दंगों की बढ़ती घटनाओं पर उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना था, 'पिछले आम चुनावों में सबने सबको धोखा देने की कोशिश की। जिसका दांव जहां चला, उसने उसका बेजा इस्तेमाल करने में कोताही नहीं बरती।'

मतदान प्रतिशत बढ़ाने पर सवाल
लिंगदोह ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने की चुनाव आयोग की कोशिश का भी विरोध किया। उनके अनुसार, 'आप मतदान प्रतिशत क्यों बढ़ाना चाहते हैं? जिन्हें वोट देना है, वे मतदान करेंगे, जिन्हें नहीं देना है, वे कत्तई वोटिंग नहीं करेंगे। उसमें हम क्यों दखल दें।'


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