MP karmchari news: सेवा की सामान्य शर्तें नियम 1961 रिवाइज, अगली कैबिनेट में मंजूरी मिलेगी

भोपाल, 2 जनवरी 2026:
मध्य प्रदेश शासन के नवनियुक्त कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज़ है। फाइनेंस डिपार्टमेंट द्वारा सेवा की सामान्य शर्तें नियम 1961 को रिवाइज कर दिया है। सबसे बड़ी राहत उन कर्मचारियों को मिली है जो प्रोबेशन पीरियड में है। फिलहाल यह ड्राफ्ट सामान्य प्रशासन विभाग के पास समीक्षा के लिए रखा हुआ है। GAD से NOC मिलने के बाद मंजूरी के लिए कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।

नवनियुक्त कर्मचारियों की फाइल को पेंडिंग नहीं कर सकते

सेवा की सामान्य शर्तें नियम 1961 में संशोधन के बाद अब अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी अपनी नई जॉइनिंग के बाद प्रोबेशन पीरियड successfully पूरा कर लेता है, तो विभाग को उसे छह महीने के अंदर नियमित करना होगा। यह बदलाव उन employees के लिए राहत की खबर है जो सालों तक फाइलों में अटककर इंतजार करते रहते हैं। अगर department समय पर ऑर्डर नहीं जारी करता, तो employee को automatically deemed regular माना जाएगा, जो उनकी job security को boost करेगा।

प्रोबेशन पीरियड में कर्मचारी की सेवा कभी भी समाप्त कर सकते हैं

यह बदलाव विशेष रूप से उन युवा candidates के लिए महत्वपूर्ण है जो सरकारी सेवा में entry level पर आते हैं और प्रोबेशन के दौरान hard work करते हैं। लेकिन साथ ही, सरकार ने strictness भी बढ़ाई है। अगर प्रोबेशन पीरियड में कोई employee काम properly नहीं करता या moral turpitude जैसे मामलों में guilty पाया जाता है, तो उसे बिना लंबी प्रक्रिया के service से terminate किया जा सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह नियम employees को disciplined रखने और government machinery को efficient बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रपोजल अगली कैबिनेट मीटिंग में प्रस्तुत किया जाएगा

वित्त विभाग ने Madhya Pradesh Civil Services (General Conditions of Service) Rules, 1961 को revise किया है। वित्त विभाग के Additional Chief Secretary (ACS) Manish Rastogi ने बताया कि proposal को General Administration Department (GAD) के पास review के लिए भेजा गया है और जल्द ही इसे cabinet में approve कराने की preparation चल रही है। यह बदलाव state employees की job satisfaction बढ़ाने और bureaucratic delays को कम करने की दिशा में एक positive step है।

इसके अलावा, तीन और महत्वपूर्ण changes भी किए गए हैं, जो सरकारी सेवा को modernize करेंगे:
1. अब permanent और temporary का distinction खत्म हो जाएगा। सभी employees को regular government servant माना जाएगा, जो equality का sense लाएगा।
2. Direct recruitment और promotion से आने वाले employees में, अगर दोनों एक ही date पर join करते हैं, तो promotion वाले को seniority मिलेगी। यह internal growth को encourage करेगा।
3. अगर कोई employee एक department से दूसरे में transfer होता है, तो उसे direct recruitment जैसे benefits मिलेंगे, जैसे seniority, increment आदि। यह inter-departmental mobility को आसान बनाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, ये बदलाव मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों को attractive बनाने और employees की morale को high रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे न केवल job seekers motivated होंगे, बल्कि existing staff भी better performance देगा।

कर्मचारियों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण समाचार: 

हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी employees के लिए leave rules में भी changes announce किए हैं, जो 1 जनवरी 2026 से apply हो गए। इनमें leave accrual की eligibility revise की गई है, duty leave की clear definitions दी गई हैं, और overall guidelines को enhance किया गया है। इससे करीब 6.5 लाख state employees को benefit मिलेगा। 
साथ ही, cabinet ने employee posts की categories को 10 से घटाकर 5 कर दिया है, जो administrative efficiency बढ़ाएगा। 
नए साल में government buses 21 साल बाद return करने, cashless healthcare, pension rules revamp जैसे reforms भी planned हैं।

X पर लोगों की प्रतिक्रियाएं: 
पिछले 24 घंटों में X (पूर्व Twitter) पर मध्य प्रदेश के labor reforms और employee rules से related discussions चल रही हैं। उदाहरण के लिए, MP CM Dr Mohan Yadav ने post किया कि नए साल में ease of doing business के लिए shops और establishments (20 से कम employees वाले) में labor inspections अब government permission से ही होंगे, जो small businessmen को relief देगा। 

एक user Velmurugan S ने gig economy और contractual jobs पर comment किया कि ये reforms MSME को help करेंगे और workers को full-time employment की दिशा में ले जाएंगे। 

Jitendra Jha ने delivery workers के protests पर कहा कि fixed salary की demand long-term में harmful हो सकती है, बल्कि earning rate increase पर focus करना चाहिए। 

Keshav Modi ने joblessness से workers को बचाने वाले platforms की सराहना की। 
Anand Sankar और Vinod Chendhil ने Zomato जैसे cases में labor disputes handle करने पर opinions दिए, जहां better working conditions की demand है लेकिन fixed salary slippery slope हो सकता है। 
ये reactions overall labor reforms को positive light में देख रही हैं, लेकिन better conditions की need highlight कर रही हैं।

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