भोपाल। परिवार परामर्श केंद्र ने पहली बार सही दिशा में कदम उठाया है। पति पत्नि के बीच बिगड़ रहे संबंधों के पीछे का असली कारण खोज निकाला और उसे दूर करने की शुरूआत भी की। काउंसलर ने हस्तक्षेप को रोकने के लिए लड़की के माता-पिता को परामर्श केंद्र में आकर मिलने की समझाइश दी। यहां तक कि मोबाइल फोन पर भी बात करने से मना कर दिया।
दरअसल एक मामले में काउंसलिंग के दौरान पति-पत्नी की बातों में काउंसलर ने पाया कि लड़की की मां ने बेटी और दामाद के बीच शक का बीज बो दिया था, इससे दोनों के बीच झगड़े होते हैं।
अन्य महिला के साथ है अवैध संबंध
निशातपुरा निवासी माधुरी शर्मा (बदला हुआ नाम) ने महिला थाने में शिकायत की थी कि, उनके पति धर्मेंद्र शर्मा (बदला हुआ नाम) मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं। वहां काम करने वाली एक महिला से उनके अवैध संबंध है। यही नहीं उनका पति उन्हें पूरा वेतन नहीं देते। उनकी कुछ आदतें है जो उसे पसंद नहीं है, मना करने पर वो मारपीट करते हैं।
मेरे कपड़ों का चुनाव भी सास करती है
मामले की काउंसलिंग कर रही काउंसलर रीता तुली ने जब धर्मेंद्र से इस संबंध में बातचीत की, तो पता चला कि माधुरी के माता-पिता का हस्तक्षेप उसके परिवार में जरूरत से ज्यादा है। यहां तक कि धर्मेंद्र किस रंग की शर्ट पहनेगा उसका निर्णय भी उसकी सास करती थी।
सास-ससुर से बचने के लिए लेट जाता था घर
धर्मेंद्र ने बताया कि, मेरे सास-ससुर और लड़की का भाई सुबह 8 बजे ही घर पर आ धमकते थे और रात को 10 बजे तक घर पर ही रहते थे। उनसे बचने के लिए मैं ऑफिस से घर देर से आता था। इस बात को लेकर मेरी सास ने बेटी के दिमाग में यह बात बैठा दी कि, मेरा किसी महिला से संबंध है। इस बात को लेकर आए दिन झगड़े होते थे।
सास कराती थी जासूसी
काउंसलर ने जब माधुरी से पूछा कि, उसे इस बारे में कैसे पता चला तो उसने बताया कि, मेरी मां ने धर्मेंद्र की जासूसी करवाई थी और पता चला कि वो किसी महिला के साथ घूमता है। जब, इस बारे में सास से पूछा गया तो उन्होंने इस बात से साफ इनकार कर दिया। सास ने कहा कि, दामाद के लेट आने पर शक हुआ था इसलिए बेटी को सचेत किया था। इस पर काउंसलर ने धर्मेंद्र के सास-ससुर और साले को धर्मेंद्र के घर न जाने की हिदायत दी। यहां तक कि उन्हें कम से कम छह माह तक बेटी से बात करने को भी मना किया।
बेटी से मिलने के लिए आना होगा काउंसलिंग के लिए
माधुरी के घरवालों को हिदायत देते हुए काउंसलर ने कहा कि, यदि आपको बेटी से मिलना या बात करना है तो पहले परामर्श केंद्र को सूचित करें। आपसी सहमति के बाद इस मामले में समझौता हो गया। इस मामले में छह माह तक फालोअप किया जाएगा। परामर्श केंद्र में कुल आठ मामलों में सुनवाई हुई।
बढ़ रहा अभिभावकों का हस्तक्षेप
परामर्श केंद्र की प्रभारी एसआई शोभा पाठक ने बताया कि थाने के परामर्श केंद्र में काउंसलिंग में आए अधिकांश मामलों में पाया गया है कि लड़की के गृहस्थ जीवन में अभिभावकों का हस्तक्षेप ज्यादा होता है। ऐसे मामलों में अभिभावकों को समझाइश दी जाती है। परामर्श केंद्र में हर दिन तकरीबन १२ मामलों में काउंसलिंग होती है। इनमें से कुछ मामलों में अभिभावकों का दखल अधिक होता है। नव दंपती के बीच हस्तक्षेप की वजह से दोनों के बीच आपसी सामंजस्य नहीं बन पाता। ऐसे मामलों में महिला थाने की कोशिश रहती है कि अभिभावक का हस्तक्षेप किसी तरह से कम किया जाए।
प्रज्ञा आर्य, महिला थाना प्रभारी
