भोपाल। 100 करोड़ से ज्यादा की काली कमाई जमा करने वाले डॉ. रविकांत द्विवेदी की प्रशासनिक व राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके खिलाफ विधान सभा में प्रश्न उठा और मंत्री ने कार्रवाई के निर्देश भी दिए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
इतना ही नहीं इसके बाद ना तो प्रश्न उठाने वाले ने दोबारा आवाज उठाई और ना ही कार्रवाई के निर्देश देने वाली मंत्रीजी ने कोई रिमाइंडर डाला। सारे के सारे घटक अचानक चुप हो गए।
सूत्रों के अनुसार पाठ्य पुस्तक निगम में एमडी के पद पर रहते हुए द्विवेदी ने अपने बेटे अंकित को गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में रेन्बो प्रिंटिंग प्रेस खुलवाई थी। द्विवेदी ने गलत तरीके से अपने बेटे की प्रेस को पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें छापने का टेंडर जारी किया था। निगम की पुस्तकोें के लिए नियम विरुद्घ बेटे को ठेका दिए जाने की शिकायत के बाद विपक्ष ने 2009 में विधानसभा में प्रश्न उठाकर हंगामा किया था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने कार्रवाई के लिखित निर्देश देकर विपक्ष का आश्वस्त किया था। बावजूद डॉ. द्विवेदी पर कोई कार्रवाई या विभागीय जांच तक नहीं हुई। आलम यह है कि आज भी निगम की किताबें द्विवेदी के बेटे की प्रिंटिंग प्रेस में ही छप रही हैं।
मजेदार तो यह है कि एक बार आवाज उठाने के बाद विपक्ष भी अचानक चुप हो गया। सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की और विपक्ष ने फिर से सवाल भी नहीं उठाया। मंत्री का आदेश मंत्री के आफिस की ही किसी फाइल में दबा दिया गया। कोई रिमाइंडर नहीं निकला और विभागीय अफसरों द्वारा मंत्री का आदेश ना मानने के बावजूद कोई आवाज नहीं उठी। इसके बाद यह मामला हमेशा के लिए रफादफा हो गया।
क्या बताना जरूरी है कि किस लेवल की सेटिंग के बाद ऐसा सबकुछ हो सकता है और द्विवेदी के इस रैकेट में उनके अलावा सत्ता और विपक्ष के कितने और किस स्तर के लोग शामिल थे।
विदिशा के खाली दान पत्र मिले
छापे के दौरान के लोकायुक्त के विदिशा जिले की कई कृषि भूमियों के दानपत्र भी मिले हैं। जिसमें किसानों से जमीनें दान में लिए जाना बताया गया है। कई दानपत्र खाली मिले हैं, जिसमें किसानों के हस्ताक्षर हैं, लेकिन किसे दिए गए हैं उल्लेख नहीं है।
बड़ा बेटा डॉक्टर व बेटी अमेरिका में
परिवार में द्विवदी दंपति के अलावा बड़ा बेटा अभिषेक है, बैंगलुरू से बीई के बाद एमबीबीएस करने के बाद वर्तमान में इंदौर से रेडियोलॉजी की डिग्री कर रहा है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर दामाद के साथ बेटी अमेरिका में हैं, छोटा बेटा फैक्टरी व प्रिंटिंग प्रेस का संचालन करता है। घर में द्विवेदी का एक छोटा भाई भी रहता है, जो कि मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया जाता है।
आज खोले जाएंगे लॉकर
छापे के दौरान लोकायुक्त पुलिस को 15 बैंक खाते, दो लॉकर और एलआईजी बीमा पॉलिसियों में निवेश की जानकारी मिली है। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार शुक्रवार को डॉ. द्विवेदी को साथ लेकर टीम बैंक पहुंचेगी, जहां उनके लॉकर खोले जाएंगे।
बेटे को लेकर फैक्टरी गई टीम
घर के छानबीन के दौरान द्विवेद्वी के बेटे के नाम पर मंडीदीप औद्यौगिक क्षेत्र में ‘प्लाई ऐश ब्रिक्स’ नामक फैक्ट्री का भी पता चला है । तत्काल बेटे अंकित को लेकर लोकायुक्त पुलिस की एक टीम फैक्टरी पहुंची। जहां से आय-व्यय और खर्चों के अलावा संचालन संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए।