भोपाल। महत्वाकांक्षी ‘आकाश टेबलेट’ को कॉलेज-यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स के अलावा प्राइमरी और हाईस्कूल स्टूडेंट्स को भी देने पर विचार चल रहा हैं। बच्चे अपनी मातृभाषा में इसके जरिए अपना ज्ञानवर्धन कर सकें, इसके लिए सरकार उन्हें भी यह टेबलेट मुहैया कराना चाहती हैं।
इसके लिए आईआईटी मुंबई एक पायलट प्रोजेक्ट 1 जुलाई से देश के 6 हाईस्कूल और कुछ प्राइमरी स्कूल में शुरू करने जा रहा हैं। पायलट प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश के भीकनगांव तहसील के एक हाईस्कूल को भी शामिल किया गया हैं।
आईआईटी मुंबई आकाश टेबलेट का नोडल सेंटर हैं। अफोर्डेबल टेक्नोलॉजी के जरिए देश में शिक्षा का प्रसार करने का विचार देने वाले आईआईटी मुंबई के कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर तथा मानव संसाधन मंत्रालय के आकाश टेबलेट प्रोजेक्ट के प्रमुख ((प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर)) डॉ. दीपक बी. फाटक ने बिजनेस भास्कर से खास मुलाकात में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हमने यूनिवर्सिटी एवं कॉलेज के स्टूडेंट्स को 1 लाख टेबलेट देने का फैसले के साथ ही स्कूली बच्चों को देने का विचार गत वर्ष नवंबर में लिया था। इसी को क्रियान्वित करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट बनाया गया हैं। साइंस एवं एजुकेशन के प्रसार के लिए इसी साल पद्मश्री से सम्मानित किए गए प्रो. फाटक ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत महाराष्ट्र के पंढरपुर के 5 हाईस्कूलों तथा मध्यप्रदेश के भीकनगांव तहसील के एक स्कूल का चयन किया गया हैं।
1 जुलाई से लेकर अगले मार्च तक इन स्कूलों के 9वीं कक्षा के एक सेक्शन के स्टूडेंट्स को टेबलेट के मार्फत तथा दूसरे सेक्शन के स्टूडेंट्स को बगैर टेबलेट के पढ़ाया जाएगा। इनके परिणामों के विश्लेषण के आधार पर इसे देशभर में लागू करने का फैसला लिया जाएगा। पंढरपुर के स्टूडेंट्स को मराठी तथा भीकनगांव के स्टूडेंट्स को हिन्दी में जानकारी देने वाले टेबलेट्स फ्री में दिए जाएंगें।