मध्यप्रदेश की मंडियों में बिक रहा है यूपी और राजस्थान का गेंहू

shailendra gupta
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अपने किसानों के गेंहू की खरीद का रिकार्ड बनाने में जुटी है लेकिन उसे शायद यह मालूम ही नहीं कि जो गंहू वो खरीद रही है उसमें एक बड़ा हिस्सा यूपी और राजस्थान से आ रहा है। मतलब यह कि सरकार की इस खरीदी का लाभ मध्यप्रदेश के किसानों को नहीं मिल रहा है।

शिवराज सरकार लगातार गेंहू खरीदी का रिकार्ड सार्वजनिक कर रही है। अभी हाल ही में उसने अपनी पीठ थपथपाते हुए बताया है कि किसानों से अब तक  6,818 करोड़ रुपए का गेंहू खरीदा जा चुका है परंतु बड़ी ही चतुराई से सरकार ने यह नहीं बताया कि यह गेंहू किस प्रदेश के किसानों से खरीदा गया है। इसमें मध्यप्रदेश के किसानों और मध्यप्रदेश के गेंहू की संख्या व मात्रा क्या है।

दरअसल उत्तरप्रदेश में अव्वल तो गेंहू का समर्थन मूल्य ही बहुत कम है। वहां 1350 और मध्यप्रदेश में 1550 एक बड़ा अंतर है। दूसरे सरकार खुद गेंहू खरीदी में रुचि नहीं ले रही। दिनांक 1 अप्रैल से शुरू होने वाली खरीदी 22 अप्रैल से शुरू हो पाई। अब तक मात्र 3000 मीट्रिक टन गेंहू ही खरीदा गया। खुले बाजार में गेंहू का भाव 1250 मिल रहा है। दूसरे पिछले साल सरकार ने गेंहू के बिलों का भुगतान महीनों बाद किया था जबकि मध्यप्रदेश में तत्काल भुगतान मिल रहा है। यह अपने आप में बहुत बड़ा कारण है जिसके चलते उत्तरप्रदेश के किसान और अनाज माफिया दोनों ही मध्यप्रदेश की मंडियों में डेरा जमाए हुए हैं। धड़ाधड़ गेंहू की ​बिक्री जारी है।

यही हालत राजस्थान की है। वहां समर्थन मूल्य तो घोषित हुए हैं लेकिन स्थानीय अनाज माफिया की सांठगांठ के चलते अधिकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित नहीं करवा रहे हैं। मजबूर किसान औनेपौने दामों में व्यापारियों को अनाज बेच रहे हैं। राजस्थान के बड़े किसान एवं अनाज माफिया गेंहू की बिक्री के लिए मध्यप्रदेश में आ जमे हैं।

माफिया का क्या इन्टरेस्ट

उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान के अनाज माफिया इन दिनों मध्यप्रदेश की गेंहू खरीदी नीति से करोड़ों बनाने में जुटे हुए हैं। दिनरात लगातार काम चल रहा है। नई नई मंडिया तलाशी जा रहीं हैं और एक साथ टनोटन माल उतारा जा रहा है। माफिया राजस्थान और उत्तरप्रदेश से 1100 के भाव में गेंहू खरीद रहे हैं और उसे जुगाड़ ट्रांस्पोर्टेशन से मध्यप्रदेश की सीमावर्ती मंडियों में लाकर बेच रहे हैं। एक क्विंटल गेंहू पर तमाम खर्चे और रिश्वत काट देने के बाद भी माफिया को कम से कम 100 रुपए का लाभ हो रहा है।

यहां शिवराज सरकार गेंहू खरीदी करवा करवा कर रिकार्ड बनाने में जुटी है, लेकिन इस रिकार्ड में यह तो दर्ज हो ही नहीं रहा कि मध्यप्रदेश में खेती फायदे का धंधा नहीं बन रही बल्कि गेंहू की दलाली फायदे का धंधा बन गई है।

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