5 साल से अपने बेटे की अस्थियां लिए न्याय के लिए भटक रही है बूढ़ी मॉ

shailendra gupta
अनूपपुर(राजेश शुक्ला)। एक मां जो पहले तो अपने बेटे को 9 माह तक कोख में पालती है, और उसके बाद जब बच्चे के जन्म के बाद उसके जीन को सांरने में जुट जाती है, की बेटा बडा होकर बुढ़ापे का सहारा बनेगा, अनूपपुर जिले में कानून की शिकार एक मॉ अपने कोख से लेकर मौत तक अपने बच्चे को सीने से लगाये न्याय के लिये पिछले पॉच साल से भटक रही है।

मामला जिले के ग्राम पंचायत बकही का है,जहां की रतनी बैगा अपने बेटे मोहन बैगा की अस्थियां 5 वर्षो से कलश में सजो कर रखा है, और आलम ये हो चला है की खुद रतनी 72 साल की हो चुकी है और हाथ पैर में जान खत्म होने को आई पर हौसला टूटने का नाम ही नही ले रहा है, आज के कानून और राजनैतिक पैसो की चमक ने इसके न्याय पाने की आशा को पूरी तरह धूमिल कर दिया, पर ये है की अपनी आखरी सांस तक न्याय के लिये भटकने की बात करती है।

क्या था मामला

जिले के बकही गांव का है, जहां 5 वर्ष शारदा खुली खदान कोल फील्ड का खोदा हुआ डैम था, 4 अप्रैल 2008 को एच०जे०आई०जूट मील सोडा फैक्ट्री ओरियंट पेपर मील अमलाई में गर्मीयों के समय पानी की किल्लत बनी रहती है, ग्रामपंचायत बकही के बिना अनुमती के पेपर मील प्रबंधन द्वारा गांव के पास बने डैम से मनमाने तरीके से पानी लिया जा रहा था, युवक मोहन उम्र 34 वर्ष ने कंपनी का खुलकर विरोध किया और अपने गांव से पानी नहीं ले जाने का विरोध करता रहा और डैम में लगे पेपर मील के पंप्पों को बंद कर दिया जिसके चलते बौखलाये जूट मील के असिस्टैंड मैनेजर गुलाब चंद जैन और उसके गार्डो द्वारा मोहन बैगा के साथ मारपीट की गई, और इसी दौरान मोहन बैगा डैम में जा गिरा इसके पश्चात उसकी मौत हो गई।

पुलिस पर लगे थे आरोप

अमलाई थाने के पूर्व ए.एस.आई राजेन्द्र त्रिपाठी ने बूढी मॉ की समस्या को उस क्त बढ़ा दिया जहां एक तरफ उसके बेटे की मौत हो चुकी थी, तो दूसरी तरफ पुलिस उद्योगपतियों से मामला सलटाने के जुगाड़ में लगी थी, जबकी घटना के कुछ ही मिनटों बाद पुलिस को जानकारी मिल गई थी पर पुलिस घटना स्थल पर दूसरे दिन पहुची और, शव को बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम करा कर आकस्मिक दुर्घटना बता कर मामले का खत्मा कर दिया।

सीएम के घर से भी खाली हाथ लौटी

इस बूढी मॉं ने जब स्थानीय प्रशासन के रवैये से परेशान हो कर यहां से लेकर भोपाल तक पहले तो कागजों मे शिकायत करती रही पर सुनने वाला कोई नही ऐसे में बूढी मॉं ने अपने कलेजे के टूकडे को न्याय दिलाने के लिये दिल्ली से भोपाल तक प्रधान मंत्री से लेकर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह के घर तक तीन बार जा कर शिकायत और न्याय की गुहार लगाई पर यहां भी किसी ने इसकी शिकायत पर गौर नही किया।

कंगाली मे आटा गीला

मृतक की बूढी मां ने बताया कि वह अपने बच्चे की अस्थियों को तब तक नही बहायेगी जब तक उसको न्याय नही मिल जाता, वहीं मृतक मोहन के परिवार में उसकी बूढ़ी मां के अलावा उसके दो बच्चियां जिनको टीबी जैसी बीमारी से ग्रस्त है, वहीं एक बेटा है जो कहीं मजदूरी कर अपने परिवार को बचाने में जुटा है तो बूढी मां लोगों के यहां बर्तन धो-धो कर घर चलाने की कोशिश कर रही है।

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