भोपाल। प्रेशर में आए नरेन्द्र तोमर ने भाजपा के शेष बचे 12 जिलाध्यक्षों की घोषणा करने की तैयारी तो कर ली, पूरी कसरत भी की परंतु 5 से ज्यादा नामों पर वो भी नेताओं को एकराय नहीं कर पाए। सात जिलों में विवाद बरकरार है और इसी के चलते एक बार फिर फाइनल होते होते सूची लटक गई।
सनद रहे कि भाजपा के जिलाध्यक्षों की निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान इन 12 जिलों में आमसहमति नहीं बन पाई थी। इसके चलते तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने जिलाध्यक्षों की घोषणा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद करने का मन बनाया था।
अब नरेन्द्र तोमर की ताजपोशी के बाद यह 'टंटे की टपरिया' उनके खाते में आ पड़ी है। वो किसी को नाराज करके मनमानी भी नहीं करना चाहते और 12 जिलों के नेताओं के बीच आमसहमति भी नहीं बन पा रही है।
बड़े नेताओं ने अपने नामों के समर्थन में धमकियां भी बड़ी बड़ी दीं हैं और सन्निकट विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनसे पंगा भी नहीं लिया जा सकता। दूसरी ओर जिलाध्यक्षों की घोषणा ना कर पाना तोमर का फेलियर माना जा रहा है।
इसी के चलते नरेन्द्र तोमर ने एक बार फिर फटाफट एक्सरसाइज कर अचानक जिलाध्यक्षों की घोषणा करने की कोशिश की। दिनभर बड़े नेताओं के फोन घनघनाते रहे, लेकिन अंतत: हुआ वही जो भाजपा में होता है। जो उलझ जाता है वो उलझा ही रह जाता है। यह लिस्ट भी उलझी रह गई।
ये हैं वो नाम जिन पर बन गई थी आमसहमति
ग्वालियर: राकेश जादौन
शिवपुरी: रणवीर सिंह रावत
उज्जैन: अनिल जैन
खरगौन: भूरेन्द्र आर्य
इन्दौर: शंकर ललवानी