छिंदवाड़ा गैंतीफावड़ा कांड: अधिकारियों को बचाने महिला कर्मचारी की सेवाएं समाप्त

shailendra gupta
छिंदवाडा। कहते है जब अन्याय कानून बन जाये तब प्रतिरोध करना कर्तव्य बन जाता है,जिले के बहुचर्चित गैती फावडा कांड में बेकसूर होने के बाद भी अपनी नौकरी गंवाने वाली महिला अधिकारी अब अपने साथ हुये अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध कर रही है, जिला पंचायत मे कार्यरत संविदा महिला अधिकारी पर जिला प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई कर सेवा समाप्त कर दी गई अब महिला अधिकारी अन्याय से लड रही है,और शासन की कार्यवाही के खिलाफ न्यायालय में जाने का मन बना रही है

वही घोटाले के जिम्मेदार कलेक्टर स्तर के और अन्य छोटे अधिकारी इस पुरे मामले मे बचकर मजे से अपनी नौकरी कर रहे है, करीब चार साल पहले जिला पंचायत में नियम विरुध्द गैंती फावडा खरीदी मामले में ग्रामीण विकास विभाग ने तत्कालीन सीईओ सहित चार अधिकारीयो, कर्मचारियो के खिलाफ कार्यवाही के लिये शासन को प्रस्ताव भेजा था,लम्बी जांच के बाद ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने गैंती फावडा घोटाले के मामले में तत्कालीन सीईओ और वर्तमान धार कलेक्टर बीएम शर्मा पर कार्रवाई के लिये शासन को प्रस्ताव भेजा था। इसी तरह रोजगार गारंटी योजना के तात्कालीन परियोजना अधिकारी व वर्तमान आरईएस के कार्यापालन यंत्री आरपी साहू सहित तात्कालीन एपीओ जेएस भदौरिया, जिला पंचायत के लिपिक लक्ष्मण बोंडे के खिलाफ भी कार्यवाही के लिये बीते वर्ष मई में कमिश्नर व कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्यवाही के निर्देश दिये गये थे,


दोषीयो को छोड महिला अधिकारी की सेवा समाप्त की


वित्तीय वर्ष २००८-०९ में जिला पंचायत नरेगा योजना में काम करने वाले मजदूरो के लिये लगभग १४ करोड के गैंती फावडो की नियम विरुध्द खरिदी की थी,इस घोटाले को लेकर विधानसभा में हंगामा मचने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के लगभग छह जांच दलो नें इस मामले की पडताल की थी चार साल लम्बी चली इस जांच में ग्रामीण विकास विभाग नें चार अधिकारियो,कर्मचारियो को दोषी पाया था, ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव के प्रस्ताव के आधार पर पुर्व सीईओ व वर्तमान धार क्लेक्टर बीएम शर्मा के निलम्बन या कार्यवाही का दायित्व शासन स्तर पर छोड दिया गया, वही आरईएस के कार्यपालन यंत्री आरपी साहू पर कारवाही कमिश्नर के भरोसे में अटकी है, इस पूरे घोटाले की जांच में दोषी पाये गये तत्कालीन एपीओ जेएस भदौरिया और लिपिक लक्ष्मण बोंडे पर कलेक्टर ने कोइ कार्यवाही नही की बीते 28 जनवरी को जिला पंचायत की संविदा अधिकारी लालिता कर्णे की सेवा  समाप्त कर दी। 


क्या कहती है महिला अधिकारी


डॉ.लालिता कर्णे ने बताया कि गैंती फावडा काण्ड के प्रकरण में छिंदवाडा कलेक्टर महेशचंद्र चौधरी द्वारा एकतरफा कारवाही कर सेवा समाप्त कर दी गई जबकि इस घोटाले में धार कलेक्टर बीएम शर्मा ,भोपाल क्लेक्टर निकुंज श्रीवास्तव आरईएस ईई आरपी साहू,एपीओ जेएस भदौरिया और लिपिक लक्ष्मण बोंडे प्रमुख थे इनके खिलाफ शासन स्तर से कार्यवाही होना प्रस्तावित थी इस घोटाले की जांच करने जितनी भी टीम आई उनकी रिपोर्ट में भी यही नाम थे,जिला क्लेक्टर ने महिला अधिकारी को सुनवाई का अवसर दिये बिना सेवा समाप्त कर दी,इस पुरे मामले में शामिल बडे अधिकारियो को बचाने के लिये एक महिला संविदा अधिकारी की बलि दी जा रही है,  


ये था मामला


नरेगा  योजना के तहत ग्राम पंचायतो  में काम करने वाले मजदूरो को कार्य के लिये गैंती फावडा जैसे औजार उपलब्ध कराने के निर्देश जारी हुये थे इसके लिये पंचायत स्तर पर कंटंजेंसी मद से खरीदी करने का प्रावधान था,मध्यप्रदेश में छिन्दवाडा एकमात्र ऐसा जिला था जंहा कमिशन की मोटी रकम के चक्कर में जिला स्तर पर गैंती फावडा की खरीदी की गई और पंचायतो को भुगतान के निर्देश दिये गये,इसके चलते एक तरफ जहा घटिया औजारो की सप्लाई की गई7 वही गैंती फावडा खरीदी के एवज में बाजार में प्रचलित कीमत से अधिक का भुगतान हुया सुत्रो की माने तो पंचायतो पर भुगतान के लिये दबाब भी बनाया गया था जिसको लेकर खासा बबाल हुया था 7


आज भी उपयोगहीन पडे है गैंती फावडे


बीते चार साल से आज भी कई पंचायतो में गैती फावडे उप्योग हीन पडे हुये है,खराब क्वालिटी के चलते कई पंचायतो ने विरोध कर भुग तान नही किया था साथ ही घतिया औजार को वापस करने की मांग की थी लेकीन ठेकेदारो ने औजार वापस नही लिये थे.जिस्के कारण ये औजार आज भि जस के तस पडे हुये है,


केंद्र की जांच टीम भी बेअसर


चार साल पहले हुये इस बहुचर्चित घोटाले की जांच करने ग्रामीण विकास मंत्रालय दिल्ली की टीम बीते दो साल पहले छिंदवाडा पहुची थी,३ सदस्यीय दल ने खरीदी की पूरे दस्तावेजो को खंगालने के बाद पंचायतो की वास्त्विक स्थिती का आंकलन कर चारो अधिकारियो ,कर्मचारियो को दोषी माना था,जांच के बाद जिले में बडी कार्यावाही की उम्मीद थी लेकिन प्रशासन ने बडे अधिकारियो को बचाने के चलते संविदा महिला अधिकारी पार गाज गिरा दी.आरटीआई कार्यकर्ता नितिन दत्ता बत्ताते है कि रोजगार गारण्टी परिषद भोपाल से इस मामले की पहले तो जानकारी नही दी जाती इस मामले में शामिल आईएएस अफसरो को बचाने और  छोटो को निपटाने की तर्ज पर कार्यवाही हो रही है, जिले के करोडो के इस घोटाले का अंजाम आखिर क्या होगा ये सवाल अभी मुह बाये खडा है। 

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