कैलाश विजयर्गीय को मिला धार की धार मौथरी करने का टास्क

shailendra gupta
भोपाल। भाजपा सरकार जब जब परेशानी में आती है, टोपी कैलाश विजयर्गीय को ही टिपा दी जाती है। अभी ताजा भोजशाला विवाद गर्माया तो एक बार फिर शिवराज सरकार की ओर से कैलाश विजयवर्गीय को इंचार्ज बना दिया गया। 

कैलाश विजयर्गीय भाजपा सरकार के ट्रवल शूटर बन गए हैं। धार के भोजशाला विवाद को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को एक बार फिर उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की याद आ गई है। मुम्बई में पत्नी का इलाज करा रहे कैलाश को आनन फानन में वापस बुलाया गया है। अब वो अब धार जाकर वहां शांतिपूर्वक ढंग से पूजा और नमाज कराने की जुगत बिठाएंगे। 

करीब सात साल पहले ऐसे ही मौके पर विजयवर्गीय ने सूझबूझ के साथ संकट को टाला था, लेकिन इस बार उनका पुराना फार्मूला भी बेकाम साबित होता दिख रहा है। उन्हें एक बार फिर इस मामले में कोई नया रास्ता सुझाने को कहा गया है। 

शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी करीब आने के साथ भोजशाला मामला गरमा गया है। चुनाव नजदीक होने के कारण हिन्दू संगठनों के इंतजार की भी इंतहा हो गई है और उन्होंने अपने पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है। धार प्रशासन की हालत इतनी पतली है कि उसने धार भोजशाला के आसपास रहने वालों को शहर छोड़ देने की सलाह तक दे डाली है। यदि वहां कुछ भी अप्रिय हुआ तो यह दाग सीधे सरकार के दामन पर लगेगा और चुनाव तक इसे मिटाया नहीं जा सकेगा। शिवराज सरकार को खतरा है कि यदि विवाद बड़ा तो कट्टवादी वोट हिन्दू और मुसलमान दोनों ही उसके खाते से निकल जाएंगे। 

इसे देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विजयवर्गीय को धार जाकर मामला संभालने को कहा गया है। पिछले कुछ दिनों से अपनी धर्मपत्नी आशा विजयवर्गीय के उपचार के सिलसिले में मुम्बई में मुकाम किए बैठे विजयवर्गीय भोपाल आ गए हैं। एक दो दिन में वह धार जाएंगे। इससे पहले 2006 में भी भोजशाला को लेकर ऐसा ही संयोग बना था।

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