बीच रास्ते में खत्म हो गई आक्सीजन, तड़प-तड़पकर मर गई मासूम

shailendra gupta
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन की चुस्त चिकित्सा व्यवस्थाओं की पोल एक बार फिर उस समय खुल गई जब सांस की तकलीफ के कारण धार से इन्दौर रिफर की गई एक मासूम को लगाई गई आक्सीजन रास्ते में ही खत्म हो गई और मासूम ने तड़पते हुए एम्बूलेंस में ही दम तोड़ दिया। 

मिल रही जानकारी के अनुसार दो साल की जिया को सांस लेने में तकलीफ थी... बुधवार रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां बच्ची का प्रारंभिक उपचार तो किया गया, लेकिन इंदौर रैफर करते समय उसकी सांसों का इंतजाम करने में घोर लापरवाही बरती। लिकेज ऑक्सीजन सिलेंडर के भरोसे उसे एम्बुलेंस से रवाना कर दिया। बेटमा आते-आते आक्सीजन खत्म हो गई और मासूम जिया की सांसें थम गई। अब अस्पताल लापरवाही से ही इनकार कर रहा है। 

धार से इंदौर यानी 62 किमी की दूरी और एम्बुलेस से डेढ़ से दो घंटे का सफर। इसके लिए ही पर्याप्त ऑक्सीजन का इंतजाम अस्पताल नहीं करवा पाया। अस्पताल के सिविल सर्जन एन.डी. सराफ कह रहे हैं कि सिलेंडर लीकेज नहीं था, संभवत: ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं थी। वहीं जिया के पिता फिरोज ने कहा जब उसे रैफर किया जा रहा था तो तीन-चार सिलेंडर अस्पताल में थे, वह भी लीकेज। इन्हीं में से एक सिलेंडर दिया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि सिलेंडर में गैस का दबाव साफ तौर पर दिखता है। ऐसे में यदि पर्याप्त आक्सीजन नहीं थी तो ऐसा सिलेंडर लगाकर बालिका को इंदौर क्यों रैफर किया गया। 

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