इटारसी में मंत्री ने की गद्दारी, फिर भी हो गए चारों खाने चित्त

shailendra gupta
भोपाल। यूं तो वनमंत्री सरताज सिंह सिवनीमालवा के विधायक हैं, लेकिन उनकी कर्मभूमि इटारसी ही है। यहां उन्होंने अपनी ही भाजपा के प्रत्याशियों को हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया, वो सफल भी हुए, लेकिन जिसे वो अध्यक्ष बनाना चाहते थे, वो भी हार गया। अंतत: अध्यक्ष पद की सीट के लिए एक कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया, लेकिन वो भी हार गया। सरताज के हाथ में न ताज रहा न उठाने कर चलने के लिए सर। 

इटारसी मंडी अध्यक्ष के चुनाव में भ्री भाजपा अपना प्रत्याशी ही नहीं उतार पाई। डायरेक्टरों के चुनाव के दौरान भाजपा नेता सुनील तिवारी एवं यशरानी तिवारी के प्रत्याशियों को हराने के लिए सरताज सिंह ने एड़ी चोटी का जोर लगाया। वो सफल भी रहे और सुनील तिवारी गुट के कई प्रत्याशी पराजित हुए। स्वयं यशरानी तिवारी भी हार गईं। 

परंतु भाजपा के मण्डल अध्यक्ष अशोक साहू जिन पर सरताज सिंह ने दाव लगाया था, वो भी जीत नहीं पाए। पड़ौसी को हराने में मशगूल सरताज सिंह यह नहीं देख पाए कि सेंध उनके घर में भी लग गई है। 

अंतत: आज अध्यक्ष पद के तौर पर भाजपा अपना प्रत्याशी नहीं उतार पाई। सरताज सिंह ने कांग्रेस नेता विक्रम सिंह तोमर को समर्थन दिया, परंतु यही समर्थन विक्रम सिंह की हार का कारण बन गया। केवल सरताज सिंह के समर्थन के चलते विक्रम सिंह के तीन वोट उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी रमेश बामने के पास चले गए और रमेश बामने अध्यक्ष निर्वाचित हो गए। 

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