भोपाल। गणतंत्र दिवस, एक ऐसा दिन जिसे राष्ट्रीय पर्व कहा जाता है। पूरे राष्ट्र का पर्व। इस अवसर पर दिल्ली के लालकिला मैदान पर होने वाले आयोजन की दर्शकदीर्घा तक जाने के लिए तक लोग अप्रोच लगाते हैं। जिस मैदान पर पूरा भारत एक साथ दिखाई देता है। हर प्रदेश हर संस्कृति की झांकी दिखाई देती है। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन में इस बार भी मध्यप्रदेश की झांकी नहीं दिखाई देगी।
इस स्थिति को राज्य सरकार के लिए ‘शर्मनाक’ बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने कहा कि यह दूसरा वर्ष है-जब देश के राष्ट्रपति की विशिष्ट उपस्थिति में होने वाली दिल्ली की गणतंत्र दिवस की राष्ट्रीय परेड में म.प्र. की झांकी वहां एकत्र लाखों लाख जनता और देश के करोड़ों टी.वी. दर्शकों को देखने को नहीं मिलेगी। झांकी में हर राज्य अपनी संस्कृति और प्रगति को दिखाकर गौरव की अनुभूति करता है।
भूरिया कहा है कि ‘स्वर्णिम म.प्र.’ बनाने का ढिंढोरा पीटने वाली शिवराज सरकार के लिए यह अत्यंत शर्मनाक स्थिति है कि वह दो साल से दिल्ली की परेड में प्रदेश की झांकी प्रस्तुत नहीं कर पा रही है, जबकि इस काम के लिए अरबों के सालाना बजट वाला जनसंपर्क विभाग अब भी काम कर रहा है। दिल्ली की परेड में झांकी के प्रस्तुतीकरण की जवाबदारी वर्ष 1956 से यही विभाग निभाता आ रहा है।
उसके लिए विभाग पूर्व वर्षो में कई महीनों पूर्व से तैयारी शुरू कर दिया करता था। आपने राज्य सरकार से कहा है कि प्रदेश के सम्मान को गहरी ठेस पहुंचाने और राष्ट्रीय समारोह में उसकी शर्मनाक अनुपस्थिति दर्ज कराने के निंदनीय कृत्य के पीछे के सच के बारे में तत्काल जनता के सामने खुलासा करें, क्योंकि राज्य सरकार की यह लापरवाही अक्षम्य अपराध है।
श्री भूरिया ने कहा है कि दिल्ली का गणतंत्र दिवस समारोह एक ऐसा बड़ा राष्ट्रीय उत्सव होता है, जिसमें झांकी प्रस्तुत करने से प्रदेश की संस्कृति और प्रगति को दुनिया भर को परिचित कराने का अवसर मिलता है। म.प्र. की भाजपा सरकार द्वारा दो साल से इस अवसर का लाभ न उठाया जाना मामूली बात नहीं है। समारोह में हर साल झांकी के प्रस्तुतीकरण का जो क्रम वर्षों से लगातार चल रहा था-वह वर्ष 2012 से भंग क्यों हो गया, उसकी हकीकत प्रदेश के सामने आना बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह कृत्य म.प्र. के हितों और उसकी गरिमा के सर्वथा खिलाफ है।
आपने सवाल किया है कि दिल्ली की परेड में प्रदेश की झांकी न निकालने के पीछे भाजपा सरकार की वह शर्मिंदगी तो काम नहीं कर रही है, जो प्रदेश में प्रगति के नाम पर पिछले नौ वर्ष में सरकार की शून्य उपलब्धि के कारण पैदा हुई है। जब कुछ दिल्ली में दिखाने योग्य किया ही नहीं है तो दिखाये क्या ? इसके बावजूद भी प्रदेश की समृद्ध संस्कृति पर केंद्रित झांकी तो दिल्ली में प्रस्तुत की ही जा सकती थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में मुख्य मंत्री शिवराजसिंह और जनसंपर्क एवं संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से प्रदेश की जनता से तत्काल माफी मांगने की मांग की है।