पूरे देश में भाजपा वाले और गैर भाजपा वाले दिन भर यह बहस करते रहे है की राजनाथ सिंह का विकल्प नितिन गडकरी और नितिन गडकरी का विकल्प राजनाथ सिंह क्यों और कैसे? भाजपा वाले सवाल उठाये तो ठीक गैर भजपा वालों को इससे क्या मतलब ? मतलब है और वह है राजनीतिक विश्वसनीयता का |
यह कोई नहीं भूला है कि नितिन गडकरी के पहले राजनाथ सिंह ही भाजपा के अध्यक्ष थे, चुनाव नतीजों के बाद भाजपा ने संघ की सलाह पर नितिन गडकरी को ताज पहनाया था| अब पूर्ति के चक्कर में होने जा रहे रिक्त स्थान की पूर्ति और आपसी खेंचतान को कम करने के लिए पुन; राजनाथ सिंह की ताजपोशी मजबूरी बन गई और सबको मानना पड़ा संघ ने जरुर अपने हाथ खींच लिए |
चर्चा है कि भाजपा ने जो फार्मूला तैयार किया था| वह कुछ इस प्रकार था [१] सुषमा स्वराज या राजनाथ सिंह [२ ] अरुण जेटली या राजनाथ सिंह [३ ]वेकैया नायडू या राजनाथ सिंह | ये तीनों फार्मूले यशवंत सिन्हा की उम्मीदवारी की आशंका के बाद बने थे | सुषमा भले ही स्वयम सेविका नहीं रही है मगर भाजपा उन्हें यशवंत सिन्हा से जायदा संघ के नजदीक मानती है| बाकि सब नितिन गडकरी के मुकाबले के स्वयम सेवक | इन फार्मूलों को लेकर जब भाजपा सघ के सर कार्यवाह के पास गई तो उन्होंने अपने फैसले खुद करने को कहा और सबके विकल्प राजनाथ सिंह, एकमत हो गया |
राजनाथ सिंह के आने से कौन खुश है और कौन नाराज टी वी पर दिख रहा है| मध्यप्रदेश के संदर्भ में इसके परिणाम अभी नहीं कुछ दिन बाद दिखाई देंगे |देश में दिखाई पड़ने लगे है |दिल्ली मुख्यालय में इस बात की जाँच हो रही है कि दिल्ली के किस बड़े नेता का हाथ पूर्ति के छापों में हैं| दिल्ली में राज्यों से आई रिपोर्ट इसे राइट च्वाइस नहीं कह रही है| २०१४ की पहले का यह बदलाव बहुत से गुल खिलायेगा |
