चंदा बारगल.भोपाल/ प्रदेश में हो रही नर्सिंग परीक्षाओं में नकलखोरी और धांधलियों को देखकर यही कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य शिक्षा पर माफिया हावी है और खुद स्वास्थ्यमंत्री से लेकर तमाम वरिष्ठ अधिकारियों का उन्हें वरदहस्त ह़ै। विभाग में चल रही धांधलियों को देखना हो तो हांडी के चांवल की माफिक नर्सिंग कौंसिल के रजिस्ट्रार को ही लें, यहां कभी भी योग्य और अनुभवी अधिकारी को पद पर बैठाने के बजाय 'कठपुतली' को यह पद सौंपा जाता है।
वल्लभ भवन के स़ूत्रों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग के कर्णधार नियोजित रूप से रजिस्ट्रार के पद पर ऐसे अधिकारी को बैठाते हैं जो 'यसमेन' होकर कायदे—कानून को बलाए ताक रखकर कौंसिल की गतिविधियों को अंजाम देता है। फिलहाल, रजिस्ट्रार के पद पर अंगूरी ठाकुर आसीन हैं, जिन्हें अनूप मिश्रा लाए हैं। इसके पहले भी अनूप मिश्रा जयंती चौरसिया को लाए थे तो राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया राजकुमारी ठाकुर को लाए थे। सूत्रों ने बताया कि रजिस्ट्रार पद के लिए कौंसिल ने कतिपय नार्म्स तय कर रखे हैं, किंतु विभाग के कर्णधार उनका ध्यान ही नहीं रखते हैं और प्राय: अयोग्य और अनुभवहीन व्यक्ति की ताजपोशी कर देते हैं।
निर्धारित मानदंड के अनुसार, रजिस्ट्रार को एमएससी नर्सिंग होना चाहिए, दूसरा उसे 8 साल का अनुभव(5 वर्ष का प्रशासनिक और 3 साल का अध्यापन का),तीसरा उसके पेपर आदि नर्सिंग जर्नल्स में प्रकाशित होना चाहिए और रजिस्ट्रार का पद विज्ञापन देकर खुली भर्ती के जरिए किया जाना चाहिए, किंतु विभाग के कर्णधार इन सब मानदंडों को दरकिनार कर तृतीय श्रेणी के अपने या अपनी खासुलखास को प्रतिनियुक्ति पर लाकर रजिस्ट्रार पद से नवाज देते हैं, जबकि यह पद प्रथम श्रेणी का है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि उनकी 'दुकान' चलती रहे।