विदिशा/ मां तो आखिर मां होती है, वह न तो बेटा कोई फर्क समझती है और न बेटा में उसके लिए दोनों बराबर हैं। कोख में पल रहे बच्चे की जान पर जब बात आई तो मां ने उस इंसान के साथ बगावत कर दी। जिसके साथ जीने-मरने की कस्में खाईं थीं। दरअसल गुरुवार को संवेदनाओं को हिला देने वाला मामला सामने आया।
जब एक विवाहिता को इस बात के लिए मजबूर किया जा रहा था कि वह सोनोग्राफी के जरिए यह पता लगाने दे कि कोख में लड़का है या लड़की। लड़की है तो उसे गर्भपात के जरिए खत्म कर दे और लड़का है तो उसे दुनिया देखने दें। राघवजी कालोनी में रहने वाली सीमा की शादी भिंड के रहने वाले बृजराज बघेल से करीब 4 साल पहले हुई थी। दोनों की एक बेटी भी है। सीमा को 3 माह का गर्भ है। बताया जाता है कि सीमा के पति सास-ससुर और ननंद यह पता लगाना चाहते हैं कि उसके गर्भ में जो बच्चा है वह लड़का है या लड़की। सीमा ने इस बात से इंकार किया तो उसके साथ बुरा बरताव किया जाने लगा। इसकी शिकायत सीमा ने पिता से की और वापस वह अपने मायके आ गई।
एक बेटी की मां है पीडिता
भिंड जिले के मौह गांव में पीडि़ता सीमा बघेल की ससुराल है। वह अपने पिता के साथ ससुराल छोड़कर हाल ही में राजपूत कालोनी स्थित मायके आ गई है। सीमा ने बताया कि उसकी एक बेटी है। वहीं वर्तमान में वह तीन माह की गर्भवती है। वह लड़का हो या लड़की उसे जन्म देना चाहती है। ससुराल पक्ष भू्रण लिंग की जांच कराने दबाव डाल कर प्रताडि़त कर रहा था। ऐसे में ससुराल में रहकर उस बच्चे को जन्म देना संभव नहीं था। इसलिए वह अपने पिता के साथ मायके चली आई। ससुराल पक्ष से परेशान होकर वह अब ससुराल जाने का मोह छोड़ चुकी है। सीमा का कहना है कि पति बृजराज बघेल कमाई नहीं करते। इसलिए भी ससुराल वाले बेटी नहीं चाहते।
क्या कहता है प्रशासन
इस तरह का मामला सामने नहीं आया है। यदि महिला को प्रताडि़त किया जा रहा है और उस पर दबाब बनाया जा रहा है तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बलरामप्रसाद चंद्रवंशी,
पुलिस अधीक्षक, विदिशा
सीमा अपने पिता के साथ शिकायत लेकर आयी थी। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर ली है। उसके बयान भी लिए गए हैं। उसने पति समेत ससुराल पक्ष के लोगों पर सोनोग्राफी के जरिए लिंक परीक्षण की जांच कराने के लिए दबाब बनाने का आरोप लगाया है।
विनीता लोड़ा, परियोजना अधिकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग