भोपाल। पिछले दिनों छतरपुर में कांग्रेस के पूर्व विधायक के चाचा द्वारा एक नाबालिग की टांगे तोड़ने के मामले में जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि मामला बंधुआ मजदूरी से जुड़ा हुआ है। एक ग्रामीण ने दीवान साहब के यहां बंधुआ मजदूरी करने से इंकार कर दिया था, इसलिए दीवान साहब ने उसके बेटे की टांगे तोड़ दीं।
यह मामला बुन्देलखण्ड में मौजूद सामंतशाही का जीता जागता प्रमाण है। यह केवल एक नाबालिग से मारपीट का मामला नहीं है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा इस इलाके में मौजूद राजशाही से जुड़ा हुआ है। यहां के छोटे छोटे जमींदार और उनके रिश्तेदार तक खुद को आज भी राजा समझते हैं और ग्रामीणों के साथ इसी प्रकार की मारपीट किया करते हैं।
घटना 8 जनवरी की है, जब पूर्व विधायक शंकर प्रताप सिंह जिन्हें इलाके में मुन्नाराजा कहा जाता है के चाचा त्रिलोक सिंह जो खुद को दीवान साहब कहलवाना पसंद करते हैं, ने शंकर रैकवार नामक एक नाबालिग युवक को नीम से बांधकर इस कदर पिटवाया कि उसकी दोनों टांगे टूट गईं।
पहले पहल त्रिलोक सिंह की ओर से बताया गया कि शंकर रैकवार ने दीवान साहब को गाली दी थी इसलिए उसे पीटा गया, लेकिन बाद में मामला कुछ और ही सामने आया। बताया जा रहा है कि पीड़ित नाबालिग शंकर के पिता सिद्धू रैकवार ने कुछ समय पहले दीवान साहब के यहां बंधुआ मजदूरी किया करता था। पिछले दिनों सिद्धू रैकवार ने दीवान साहब के यहां काम करना बंद कर दिया। इसी से नाराज दीवान साहब ने उसके खिलाफ कई कार्रवाईयां की। उसकी पिटाई की गई एवं उसके खिलाफ कुछ फर्जी मामले भी दर्ज कराए गए। इसके बावजूद जब सिद्धू बंधुआ मजदूरी के लिए तैयार नहीं हुआ तो उसके बेटे शंकर को नीम के पेड़ से बांधकर मारा गया।
छतरपुर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तो दर्ज कर ली है, परंतु लोकल जागीदारी से डरी हुई पुलिस ने आज तक त्रिलोक सिंह की गिरफ्तारी की कोई कोशिश नहीं की है। आरोप तो यह भी है कि पुलिस ने मामला ही इतना मामूली दर्ज किया है कि त्रिलोक सिंह के खिलाफ न्यायालय में भी कोई कड़ी सजा की उम्मीद नहीं की जा सकती।