रुचिग्रुप पर आयकर का छापा: 200 फर्जी कंपनियां और 500 करोड़ मिले

shailendra gupta
भोपाल। इन्दौर में रुचिग्रुप पर आयकर छापे के दौरान 200 फर्जी कंपनियों एवं 500 करोड़ की अवैध आय का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है, परंतु जो खुलासा हुआ, लोगों का कहना है कि बहुत कम है। आयकर टीम भी इसे लेकर सनाके में हैं। 

इंदौर के कैलाश शाहरा के रुचि ग्रुप पर आयकर छापों में विभाग को मुंबई और इंदौर की इनवेस्टिगेशन टीम होने के बावजूद कोई खास मटीरियल हाथ नहीं लगा। शाहरा के घर में महज दो लाख ही कैश मिला जिसे लौटा दिया। सोना भी नौ सौ ग्राम ही मिला वह भी शाहरा परिवार को लौटा दिया गया। 18 लाख की डायमंड की ज्वेलरी मिली है जिसके बिल और चुकाए गए टीडीएस की जांच की जा रही है। 13-14 लॉकर्स मिले हैं जिन्हें सर्च खत्म होने के बाद खोला जाएगा। कैश और सोना ज्यादा नहीं मिलने के कारण आयकर अधिकारियों को निराशा हाथ लगी है क्योंकि कैश से सीधी टैक्स चोरी सामने आती है। 

इस कार्रवाई के दौरान करीब 200 बोगस कंपनियां सामने आई हैं जिनसे अफसरों की उम्मीद बनी हुई है। देर शाम तक घर की सर्चिग पूरी हो चुकी थी और अधिकारी सरेंडर के लिए ग्रुप के कर्ताधर्ताओं से बात कर रहे थे।

जांच में सामने आई अधिकतर बोगस कंपनियों का रजिस्टर्ड ऑफिस 20, जौहरी पैलेस फस्र्ट फ्लोर बताया गया है। आयकर अधिकारियों ने पड़ताल की तो सामने आया कि इस पते पर हमेशा ताला रहता है। इतना ही नहीं इनका रजिस्टर्ड ऑफिस इंदौर का है जबकि पैन नंबर रायगढ़ (छग) आयकर रेंज से ले रखा था। इन कंपनियों ने कितना काला धन सफेद किया अधिकारी इसकी पड़ताल कर रहे हैं। 

जानकारी के अनुसार अभी तक करीब पांच सौ करोड़ रुपए से अधिक की अघोषित आय सामने आई है। आयकर जानकारों के अनुसार ग्रुप के कारोबार के हिसाब से यह आंकड़ा काफी कम है। हालांकि एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि आंकड़ा बढ़ जाएगा। बुधवार रात तक शहर के पांच स्थानों को छोड़ सभी जगह आयकर की कार्रवाई खत्म हो चुकी थी।

गुरुवार को सभी टीमों की रिपोर्ट एकत्रित की जाएगी। मुंबई के आईटी इनवेस्टीगेशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार खाताबही में बड़ी मात्रा में गड़बड़ी मिली है। स्टॉक का मिलान भी सही नहीं निकला। सूत्रों के अनुसार इनवेस्टीगेशन टीमों के बीच समन्वय की कमी और सटीक सूचना नहीं मिलना भी छापे की विफलता का कारण माना जा रहा है। टैक्स चोरी के बड़े सबूत नहीं मिलने से संभावना जताई जा रही है कि छापे की सूचना लीक हुई जिसके बाद ग्रुप ने दस्तावेज छिपा लिए हैं।

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