भोपाल। प्रभात झा और शिवराज सिंह के बीच चल रहा राजनैतिक कलेश अब सार्वजनिक हो गया है। प्रभात झा की छुट्टी के बाद टीम प्रभात ने शिवराज सिंह के खिलाफ हमले भी शुरू कर दिए हैं। प्रभात पूर्व में पत्रकार रहे इसलिए उनकी टीम में पत्रकारों की संख्या भी खासी है अत: हमलने भी इसी ओर से आना शुरू हुए हैं।
अपने एक लेख में पत्रकार गौरव चतुर्वेदी ने शिवराज सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पूरी की पूरी चुनाव प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया था। उन्होंने पर्यवेक्षक रविशंकर प्रसाद पर मूकदर्शक बने रहने का भी आरोप लगाया है। इस मामले में आपके क्या विचार है उसके लिए कमेंट बॉक्स उपलब्ध है, लीजिए पढ़िए पत्रकार गौरव चतुर्वेदी का यह लेख जो उन्होंने भोपालसमाचार.कॉम को मेल किया।
भाजपा प्रदेश संगठन की चुनाव प्रक्रिया शिवराज खेमे ने की हाईजैक
गौरव चतुर्वेदी/ भोपाल। मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के संगठन चुनाव के दौरान प्रदेशाध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रतिनिधि के निर्वाचन प्रक्रिया मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के गुट ने हाईजैक कर ली। इस पूरी प्रक्रिया देश के सुप्रसिद्ध राम लला के वकील और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्यप्रदेश भाजपा के निर्वाचन अधिकारी रविशंकर प्रसाद मूक बनकर देखते रह गए। नए प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर के निर्वाचन के उत्साह को देखते हुए भाजपा के सामान्य कार्यकर्ताओं ने शिवराज दम के आगे चुप्पी साधने में भलाई समझी।
भाजपा संगठन के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी थावरचंद गेहलोत ने भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रविशंकर प्रसाद को 15-16 दिसंबर को मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के प्रतिनिधि चुने जाने का दायित्व सौंपा था। पन्द्रह दिसंबर को नामांकन पत्र भरे जाना थे, उनकी स्कूटनी की जाना थी और नाम वापसी होना थी। इस प्रक्रिया की समाप्ति के बाद जब इस प्रतिनिधि ने सहायक निर्वाचन अधिकारी नंदकुमार चौहान से नामांकन फार्म की जानकारी मांगी तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि एकमात्र फार्म प्रदेशाध्यक्ष के लए नरेंद्रसिंह तोमर का प्राप्त हुआ है। राष्ट्रीय प्रतिनिधि के लिए कोई भी फार्म जमा नहीं हुआ। अब प्रदेश से राष्ट्रीय प्रतिनिधि चुनकर भेजने का अधिकार नव निर्वाचित प्रदेशाध्यक्ष को रहेगा।
श्री प्रसाद ने पत्रकार वार्ता में इस बात की घोषणा की थी कि प्रदेशाध्यक्ष के लिए एक ही नामांकन फार्म प्राप्त हुआ जो वैध पाया गया और जब मैंने तोमर से नाम वापसी के लिए पूछा तो उन्होंने नाम वापस लेने से इनकार कर दिया। वहीं 16 दिसंबर को औपचारिक घोषणा के दौरान प्रदेश प्रतिनिधियों की सभा में भी प्रसाद ने घोषणा की कि उन्हें राष्ट्रीय प्रतिनिधि के लिए 29 फार्म प्राप्त हुए थे। निर्वाचन की स्थिति नहीं बन रही है, इसलिए उनके नामों की घोषणा की जा रही है और नाम घोषित कर दिए।
घोषित नाम इस प्रकार हैं – कैलाश जोशी सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, सुषमा स्वराज, थावरचंद गेहलोत, सत्यनारायण जटिया, सुमित्रा महाजन, शिवराजसिंह चौहान, लक्ष्मीनारायण पांडे, फग्गनसिंह कुलस्ते, प्रभात झा, वीरेंद्र खटिक, दलपतसिंह परस्ते, चंद्रमणि त्रिपाठी, जयभानसिंह पवैया, दिलीपसिंह भूरिया, छतरसिंह दरबार, कुसुम महेदेले, रविनंदन सिंह, हरनामसिंह राठौर, चौधरी चंद्रभानसिंह, अंतरसिंह आर्य, जगन्नाथसिंह रघुवंशी, प्रभाकरसिंह, हुकुम यादव, सज्जनसिंह उइके, विद्यासागर पांडे, रामस्वरुप गुप्ता, राम जाटव, रामबहादुर दुबे।
घोषित नामों में शामिल सुषमा स्वराज और थावरवचंद गेहलोत, जयभानसिंह पवैया नामांकन प्रक्रिया के दौरान मौजूद नहीं थे। फार्म पर हस्ताक्षर जरूरी हैं, अगर नामांकन फार्म ही जारी नहीं हुए थे तो उन पर हस्ताक्षर कैसे हो गए? सूत्रों के अनुसार भाजपा के संगठन चुनाव की निर्वाचन प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बताने के प्रयास में शिवराज गुट ने प्रक्रिया को हाईजैक कर लिया। प्रदेश के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुप्रसिद्ध वकील रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में बोगस चुनाव होना पार्टी के लिए हास्यास्पद है, वहीं मप्र के निर्वाचन अधिकारी और प्रदेशाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रतिनिधि की निर्वाचन की प्रक्रिया में सहायक निर्वाचन अधिकारी बनाए गए, नंदकुमार चौहान नंदु भैया का कहना है कि प्रदेशाध्यक्ष को अधिकार होता है कि वे राष्ट्रीय प्रतिनिधि निर्वाचित करें, टेलिफोनिक सहमति के बाद उनके फार्म भरकर जमा किए जाएं।
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