चंदा बारगल/ बकौल प्रभात झा, उन्हें हटाए जाने की कार्रवाई में पोखरण विस्फोट जैसी गोपनीयता बरती गई। आखिर, भाजपा जैसी संस्कारित पार्टी में प्रभात झा को प्रदेश भाजपाध्यक्ष पद से ऐसी बिदाई क्यों दी गई। पढ़िए, उन्हें हटाए जाने की मूल वजह:
(1) महल से टकराव,
(2) नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह के खिलाफ मुहीम चलाने पर किरकिरी,
(3) पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा को सुनियोजित रूप से हाशिए पर धकेलना,
(4) अटलजी के भांजे और पिछले महीने डेढ़ साल के वनवास के बाद मंत्री बने अनूप मिश्रा से टकराव,
(5) प्रदेश एवं जिलों में मनमाने ढंग से नियुक्तियां करना,
(6) पुत्र की संपत्ति का मामला,
(7) मंत्रियों—विधायकों की क्लास लेकर समानांतर सत्ता केंद्र स्थापित करने की कोशिश,
(8) अपनी मनमर्जी के चलते पार्टी की प्रथम पंक्ति एवं द्वितीय पंक्ति के नेताओं की नाराजगी मोल लेना।
प्रभात को मलाल जरूर होगा, किंतु यही वे कारण हैं, जिसके कारण भाजपा को 'पोखरण' जैसी गोपनीयता बरतना पड़ी और आनन-फानन उन्हें हटाकर नरेंद्रसिंह तोमर की प्रदेश अध्यक्ष पद पर दुबारा ताजपोशी कर दी गई।
