इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के सिलेबस में बड़ा परिवर्तन | EDUCATION NEWS

Thursday, January 25, 2018

नई दिल्ली। अब पूरे देश में ENGINEERING और MANAGEMENT कॉलेजों (आईआईएम छोड़कर) में एक समान SYLLABUS होंगे। AICTE ने बुधवार को पहली बार UNIFORM SYLLABUS जारी किया है। इसमें इंडस्ट्री की मांग के अनुसार थ्योरी के बजाए प्रैक्टिकल पर जोर है। यह 2018-2019 सत्र से लागू होगा। इंजीनियरिंग के अंडरग्रेजुएट कोर्स में 220 की जगह अब 160 क्रेडिट होंगे। वहीं, पीजी में 60 से 144 की जगह 68 क्रेडिट होंगे। एमबीए और पीजीडीएम कोर्स के लिए 120 क्रेडिट तय किए गए हैं। इंटर्नशिप के 14 क्रेडिट होंगे, अभी 16 से 18 क्रेडिट होते हैं। एक क्रेडिट के लिए 40 से 45 घंटे की इंटर्नशिप होगी। हर इंस्टीट्यूट अपने बजट का 1% ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सेल पर खर्च करेगा। 

10वीं से ही छात्रों को मिलेगी SKILL EDUCATION
एआईसीटीई चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि अब 10वीं के छात्र भी स्किल एजुकेशन में डिप्लोमा ले सकेंगे। यह उन्हीं इंस्टीट्यूट में मिलेगा, जो इसे चलाएंगे। दसवीं पास के लिए दो वर्षीय डिप्लोमा ऑफ वोकेशनल कोर्स और जो दसवीं उत्तीर्ण नहीं हैं, उनके लिए डिप्लोमा ऑफ स्किल कोर्स शुरू किया जाएगा। 

वेद पुराण भी पढ़नें होंगे
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की तरफ से यह नया फरमान जारी किया गया है। इसके आदेश के अनुसार इंजीनियरिंग के छात्रों को अब तकनीक के साथ-साथ पुराणों, वेदों की जानकारी भी लेनी होगी। एआईसीटीई की ओर से जारी किए गए नए पाठ्यक्रम के अनुसार अब छात्रों को अपने पाठ्यक्रम के साथ वेद, पुराण और शास्त्र आदि का भी अध्ययन करवाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि पाठ्यक्रम में यह बदलाव इसी साल से किए जा सकते हैं। 

थाॅट प्रोसेस को बेहतर बनाना मकसद
गौरतलब है कि इंजीनियरिंग के छात्रों को अनिवार्य कोर्स के साथ संविधान और पर्यावरण विज्ञान के बारे में भी जानकारी दी जा सकती है और इसकी परीक्षा में छात्रों द्वारा हासिल किए गए अंकों को उनके फाइनल मार्क्स में नहीं जोड़ा जाएगा। बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार किया गया है, क्योंकि अपडेटेड सेलेबस छात्रों का आधिकार है। भारतीय परंपराओं के ज्ञान वाले इन कोर्स में भारतीय दार्शनिक, भाषा, योग और कलात्मक परंपराओं पर ध्यान दिया जाएगा। जावड़ेकर ने इस पाठ्यक्रम को कोर्स में शामिल करने के पीछे छात्रों के थाॅट प्रोसेस, तर्क और इनफ्रेंसिंग के बुनियादी सिद्धांतों के बारे में बताना मकसद है। 

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