“मामा” के दौरे और “महाराजा” का मरहम

Wednesday, June 14, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। शिवराज सिंह के चुनाव क्षेत्र में भी किसान ने आत्महत्या कर ली। अब जब कई नेताओं के दौरों के बाद मुख्यमंत्री मंदसौर जाने के मंसूबे बाँध रहे थे, 3 किसान मौत को गले लगा रहे थे। इस सप्ताह में ही 5 किसान आत्म हत्या कर चुके हैं। भाजपा, कांग्रेस, मुख्यमंत्री और सरकार अपनी-अपनी तरह से इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार की घोषणा से न तो किसान खुश है और न व्यापारी। सरकार की घोषणा के खिलाफ अब व्यापारी आन्दोलन पर उतर आये हैं। इन आंदोलनों ने साबित कर दिया है लोकप्रिय सरकार की बात “अपने मुंह मियां मिठ्ठू” बनने ज्यादा कुछ नही है।

शिवराज सिंह के दो करोड़ी उपवास से हिंसा नहीं रुकी, इसके और भी बहुत से कारक हैं। उनकी घोषणा को तो किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया। न तो किसान ने, न व्यापारी ने जनता तो बहुत से पहले से मान बैठी है, इनका पानी उतर गया। अब कांग्रेस ने महाराजा को मरहम लेकर भेजा है। मरहम से घाव नही भरते, घोषणा से चिता की आंच कम नहीं होती।

मध्य प्रदेश की तरह महराष्ट्र में भी घोषणाएं हो रही हैं। ये घोषणाएं समस्या के समाधान से ज्यादा एक बहुत बड़ी समस्या के सिर उठाने का संकेत दे रही हैं। मध्यप्रदेश ही नही देश सभी राज्यों में, खासकर उनमें जहां भाजपा का राज चल रहा है, किसानों के बीच यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि अगर वे भी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की तरह मजबूती से कर्जमाफी और फसलों के वाजिब दाम का मुद्दा उठाएं तो राज्य सरकारों को झुक कर उनकी मांग माननी पड़ेगी। इस चर्चा का पहला असर गुजरात में देखने को मिल सकता है जहां इसी साल चुनाव होने वाले हैं। राजस्थान में ऐसा ही आंदोलन शुरू होने की बात कई दिन से चल रही है। पूरे देश में सतह के नीचे मौजूद किसान असंतोष को समवेत स्वर देने के लिए किसान संगठनों की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने कुछ दिनों के शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रमों के बाद १६  जुलाई को सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर तीन घंटे के चक्का जाम की घोषणा की है। समय आ गया है कि इस मामले में केंद्र सरकार अपनी तरफ से पहल करके किसान संगठनों से बात करे, उनकी मुश्किलें समझे और उनके समाधान में किसान प्रतिनिधियों को भी भागीदार बनाए।

दुःख से आब तो यह क्षोभ की बात हो गई है की राजनीति के चलते किसान आन्दोलन सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश में दिख रहा है। किसान मर रहे है, बच्चे बिलख रहे है, मंडी बंद है, मामा घूम रहे है, उन्हें घोषणा करने का दौरा पडा है और महाराजा के हाथ में  चिन्मिनाहट पैदा करने वाला मरहम है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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