विफल VTP मॉडल को खत्म करने की उठी मांग, DPI आदेश के बाद बड़े आंदोलन की रणनीति

Updesh Awasthee
भोपाल, 1 नवंबर 2026:
मध्य प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों (वोकेशनल ट्रेनर्स) और आउटसोर्सिंग कंपनियों (VTPs) के बीच लंबित मानदेय को लेकर गतिरोध तेज हो गया है। व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने व्यवस्था को बदलने के लिए आंदोलन का मन बना लिया है। 

आंदोलन की रूपरेखा तैयार की
नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ (NVETA) द्वारा जिला स्तर पर दिखाई गई एकजुटता और तत्परता के चलते लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने दीपावली से पूर्व वेतन आहरण हेतु आधिकारिक पत्र जारी किया है।हालांकि, महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि 10 वर्षों से चले आ रहे विफल VTP मॉडल को समाप्त किए बिना प्रशिक्षकों का शोषण बंद नहीं होगा। 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी, संभाग प्रभारियों और जिला अध्यक्षों की उपस्थिति में वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई तथा आगामी वृहद आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई।

बैठक के प्रमुख बिंदु एवं महासंघ का रुख:
संगठन ने विभाग के पत्र का स्वागत किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि यदि VTPs ने विभागीय निर्देशों की अवहेलना की, तो DPI को उन पर तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी। ऐसा न होना विभाग की विफलता माना जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों में दिवाली से पूर्व संपूर्ण वेतन आहरण संदेहास्पद प्रतीत हो रहा है। यदि तय समय में पूरा मानदेय नहीं दिया गया, तो यह स्वतः सिद्ध हो जाएगा कि 10 वर्षों से थोपा गया बीटीपी मॉडल पूरी तरह विफल हो चुका है।

जब शासन का प्रशासनिक तंत्र (जिला व्यावसायिक समन्वयक (DVC) एवं संभागीय व्यावसायिक समन्वयक) पहले से सुदृढ़ रूप से मौजूद है, तो वेतन आहरण सीधे जिला स्तर से क्यों नहीं किया जा सकता? बिचौलियों की मध्यस्थता खत्म होते ही 4 से 6 माह की अमानवीय विलंबता हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। 

मॉनिटरिंग के लिए जब पृथक बजट का प्रावधान है, तब ट्रेनर्स की सैलरी से अवैध कटौती कर VTPs को कमीशन के रूप में करोड़ों का बजट दिए जाने पर तीखा विरोध दर्ज कराया गया। संगठन ने इसे शासन के राजस्व को नुकसान और ट्रेनर्स का खुला शोषण बताया। 

10 वर्षों में यह मॉडल न तो समय पर मानदेय दे सका, न सम्मानजनक वेतन और न ही जरूरी सवैतनिक अवकाश। प्रशिक्षकों का सम्मानजनक जीवन स्तर तभी संभव है जब आउटसोर्सिंग/बीटीपी मॉडल समाप्त हो और योग्यता अनुसार सम्मानजनक वेतन व सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

आर-पार की लड़ाई की तैयारी
महासंघ ने समस्त जिला अध्यक्षों, संभाग प्रभारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों को जिला स्तर पर आगामी वृहद आंदोलन के लिए पूर्ण रूप से तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। संगठन का कहना है कि अब लड़ाई केवल टुकड़ों में वेतन मिलने की नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन और संपूर्ण हक प्राप्त करने की है।

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