भोपाल, 8 अक्टूबर 2026: सरकारी कर्मचारियों को अपने हक के लिए ड्यूटी से अनुपस्थित होने और हड़ताल का अधिकार प्राप्त है परंतु यदि शासन की तरफ से कोई विशेष निर्देश जारी होते हैं, अथवा सरकार की किसी विशेष योजना के प्रति असहयोग करना, अधिकार नहीं बल्कि अपराध है। यह सरकार की योजना को विफल करने की साजिश माना जाता है। कुछ ऐसी ही परिस्थितियों के चलते मध्य प्रदेश में 27 पटवारी को बर्खास्त कर दिया गया जबकि 21 को सस्पेंड कर दिया गया। सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया।
मामला क्या है
मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों की करीब 50 लाख संपत्तियों की एक साथ मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर सरकार के 3,800 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इसी आबादी भूमि पर काबिज लोगों को रजिस्ट्री के जरिए मुफ्त में मालिकाना हक देने की प्रक्रिया की जा रही है। यह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की महत्वाकांक्षी योजनाएं क्योंकि इसमें निर्धन लोगों को उनके घर की रजिस्ट्री मिलने वाली है। इतनी बड़ी संख्या में "अधिकार अभिलेख" के निष्पादन हेतु पटवारी को आदेशित किया गया है परंतु पटवारी ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है। वह सरकार का विरोध कर रहे हैं।
इसी विवाद के चलते आगर मालवा में पांच, उज्जैन में चार, शाजापुर में चार, रतलाम में चार, मंदसौर में चार, देवास में तीन और नीमच में तीन पटवारी को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा रीवा में 15, गुना में चार और सतना में दो पटवारी को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा पूरे मध्यप्रदेश में 100 से ज्यादा पटवारी को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया है।

