भोपाल, 5 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश में जब तक कोई कांड ना हो जाए, अधिकारी अपना काम नहीं करते। अप्रैल 2024 को जो काम पूरा हो जाना चाहिए था, भोपाल कलेक्टर ने 5 अक्टूबर 2026 तक नहीं किया। जबकि यह जनहित का मामला है। लोगों की जान खतरे में है और कलेक्टर साहब, विधायक महोदय के इशारे का इंतजार कर रहे हैं। इस सबके बीच में दीपावली आ गई है और भोपाल का हलालपुर पटाखा बाजार, पिछली बार की तरह अपनी निर्धारित लिमिट से ज्यादा आतिशबाजी के स्टॉक से भरा हुआ है। बस एक चिंगारी बड़ा धमाका कर सकती है और यदि घटना के समय आसमान में फ्लाइट हुई तो भोपाल कलेक्टर की लापरवाही, वर्ल्ड फेमस हो जाएगी।
फरवरी 2024 में अल्टीमेटम दिया था
आपको याद होगा हरदा पटाखे फैक्ट्री की दर्दनाक घटना फरवरी 2024 में हुई थी। हरदा में मरने वाले लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले भोपाल में 20 से ज्यादा दुकान और गोदाम को सील कर दिया गया था। मीडिया में कलेक्टर का सिंघम स्टाइल स्टेटमेंट छपा था। 45 दिन बाद हलालपुर में बारूद का तिनका भी नहीं मिलेगा। सभी दुकानदारों को शहर के बाहर शिफ्ट हो जाने के लिए अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन जैसा अखबारों में छपा था, टीवी पर चला था, वैसा ऑर्डर कभी जारी ही नहीं हुआ। उल्टा कलेक्टर के ऑफिस में पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस रिन्यू कर दिए।
हलालपुर, पटाखा व्यापारियों का पुश्तैनी बाजार नहीं है
पटाखा व्यापारी कई प्रकार की बातें करते हैं लेकिन सरकारी रिकार्ड बताते हैं कि हलालपुर, पटाखा व्यापारियों का पुश्तैनी बाजार नहीं है। अभी 29 साल पहले, 1997 तक यह बाजार भोपाल के कबाड़खाना में लगता था। सिद्धांत के बारूद का व्यापार, शहर के बाहर होगा। कबाड़खाना इलाके में आबादी बढ़ गई तो बाजार को शहर के बाहर यानी हलालपुर शिफ्ट कर दिया गया था। अब हलालपुर में आबादी बढ़ गई है। यदि कलेक्टर, हलालपुर में पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस रिन्यू करना बंद कर दे, तो प्रॉब्लम अपने आप सॉल्व हो जाएगी।
इसी साल 12 जून को धमाका हुआ था, कलेक्टर सुन नहीं पाए
इसी साल 2026 में 12 जून को हलालपुर में बड़ा धमाका हुआ था। आधी रात को पटाखा दुकान में भीषण आग लग गई। दुकान में रखे पटाखों के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और लगातार धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा था। पास में पेट्रोल पंप और बड़ा पटाखा बाजार होने के कारण स्थिति बेहद गंभीर हो गई। कई फायर स्टेशनों से पहुंची दमकल टीमों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई इसलिए शायद कलेक्टर इस आवाज को सुन नहीं पाए। दरअसल इस तरह की आवाज सुनना भोपाल कलेक्टर की आदत में नहीं है:-
- जब तक अस्पताल में घायलों की भीड़ न लग जाए।
- जब तक व यात्राओं में आक्रोश की वीडियो वायरल ना होने लगे।
- जब तक राहुल गांधी मुद्दा ना बना दे, तब तक हलालपुर का मामला सॉल्व कैसे हो सकता है।
अब इन खबरों से क्या होगा
अकेला भोपाल समाचार नहीं, भोपाल का हित चाहने वाले सभी पत्रकार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। क्योंकि आंखों से दिखाई दे रहा है की हालत खतरनाक है और 12 जून 2026 की घटना ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात है। इसलिए हम पत्रकार अपना धर्म निभा रहे हैं लेकिन जनता को इसका फायदा नहीं होने वाला है, बल्कि असली फायदा कलेक्टर की मैदानी टीम को होगा। इन खबरों को ले जाकर कलेक्टर की टीम के फील्ड ऑफिसर्स, पटाखा व्यापारियों पर प्रेशर क्रिएट करेंगे। बोलेंगे मीडिया का बहुत दबाव है। फिर क्या होगा आपको भी पता है। समस्या सबसे बड़ी यह है कि, समस्या उठाओ तो समस्या और समस्या ना उठाओ तो समस्या। समस्या तो रहती है बस समाधान नहीं होता है।

